लोनी में भक्ति का सागर उमड़ा: केवट–भरत प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर

0
1

जन वाणी न्यूज़

लोनी में भक्ति का सागर उमड़ा: केवट–भरत प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता जन वाणी

गाजियाबाद/लोनी, 21 अप्रैल 2026।

लोनी के सिद्ध बाबा रामपार्क में आयोजित भव्य श्रीरामकथा के आठवें दिन भक्ति, भाव और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान केवट और भरत प्रसंग के मार्मिक वर्णन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।

कथा व्यास परम पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों में श्रीराम के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भरत और केवट दोनों ही भक्ति, त्याग और समर्पण के अनुपम प्रतीक हैं। भरत ने जहां राज्य सुख का त्याग कर भाई प्रेम की अद्वितीय मिसाल पेश की, वहीं केवट ने निष्काम सेवा भाव से प्रभु के चरण धोकर सच्ची भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया।

कथा के दौरान वनगमन प्रसंग में श्रीराम और निषादराज गुह की मित्रता तथा गंगा पार कराने वाले केवट के प्रसंग का अत्यंत भावुक चित्रण किया गया। व्यास जी ने बताया कि सच्ची भक्ति में किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं होता—केवट की भक्ति इसी निष्काम भाव की पराकाष्ठा है, जो उसके साथ-साथ उसकी आने वाली पीढ़ियों के उद्धार का माध्यम बनी।

राम-भरत मिलन प्रसंग ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। व्यास जी ने भरत को प्रेम, त्याग और आदर्श भाईचारे की सर्वोच्च मिसाल बताते हुए कहा कि यह प्रसंग मानव जीवन में रिश्तों की पवित्रता और कर्तव्यबोध का संदेश देता है। उन्होंने ए. पी. जे. अब्दुल कलाम और स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान, साधना और समर्पण से व्यक्ति समाज और राष्ट्र को नई दिशा दे सकता है।

इस अवसर पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी, महामंडलेश्वर परमहंस दाती जी महाराज तथा महंत राधेश्याम पुरी सहित अनेक संत-महात्माओं ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन की सराहना की।

कार्यक्रम के आयोजक व लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हम सभी के लिए आदर्श है। उनके त्याग, मर्यादा, सेवा और कर्तव्यपरायणता को अपने जीवन में उतारना ही सच्ची रामभक्ति है। उन्होंने कहा कि यह श्रीरामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, एकता और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का एक महाअभियान है।

विधायक ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात कर समाज को बेहतर बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं। साथ ही उन्होंने गुरुवार को आयोजित होने वाले कथा के अंतिम दिवस में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया।

श्रीरामकथा के आठवें दिन का यह आयोजन भक्ति, भावनाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा, जिसने श्रद्धालुओं के मन में प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था को और अधिक दृढ़ कर दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here