युद्धविराम के साथ शांति समझौते की राह पर अमेरिका-ईरान, हार्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने से दुनिया ने ली राहत की सांस

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जन वाणी न्यूज़

युद्धविराम के साथ शांति समझौते की राह पर अमेरिका-ईरान, हार्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने से दुनिया ने ली राहत की सांस

कई दिनों के तनाव और सैन्य टकराव के बाद कूटनीति की जीत, वैश्विक व्यापार और तेल बाजार में लौटा भरोसा

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वॉशिंगटन/तेहरान, 15 जून (एजेंसियां)। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात पैदा करने वाले अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दुनिया के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू होने के साथ ही एक प्रारंभिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है। इसी के साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी माने जाने वाले हार्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और समुद्री यातायात सामान्य करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

कई दिनों तक चली सैन्य कार्रवाई, मिसाइल हमलों, समुद्री सुरक्षा संकट और वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बाद आए इस घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह समझौता स्थायी रूप लेता है तो पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता लौटने की संभावना बढ़ सकती है।

युद्ध के मुहाने से वार्ता की मेज तक

एजेंसी रिपोर्टों के मुताबिक हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था। समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई थी। इसी बीच विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के प्रयासों से दोनों पक्षों के बीच वार्ता का मार्ग प्रशस्त हुआ।

सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक समझौते में सैन्य कार्रवाई रोकने, तनाव कम करने तथा आगे के विवादित मुद्दों पर बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अभी अंतिम सहमति बनना शेष है।

हार्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने से वैश्विक राहत

शांति प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम हार्मुज़ जलडमरूमध्य को पुनः खोलने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग विश्व अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा के रूप में जाना जाता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है।

तनाव बढ़ने के दौरान इस मार्ग पर खतरे की आशंका के कारण अनेक जहाजों ने अपनी आवाजाही सीमित कर दी थी। समुद्री बीमा दरों में भारी वृद्धि हुई और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा हो गई थी। अब मार्ग खुलने की प्रक्रिया शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत ने राहत की सांस ली है।

अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई स्थिति

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक घोषणा के बावजूद समुद्री गतिविधियों को पूरी तरह सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है। जहाजरानी कंपनियां अभी भी सुरक्षा एजेंसियों की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। समुद्री मार्गों की निगरानी बढ़ा दी गई है तथा संभावित सुरक्षा खतरों की समीक्षा जारी है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में विश्वास बहाली और व्यापारिक गतिविधियों की पूर्ण वापसी चरणबद्ध तरीके से होगी।

तेल बाजार में लौटी स्थिरता

युद्धविराम और शांति समझौते की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में सकारात्मक असर दिखाई दिया। पिछले दिनों संभावित आपूर्ति संकट की आशंका से बढ़ी कीमतों में नरमी दर्ज की गई है। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि समझौता सफल रहता है तो तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होगा।

भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम

भारत दुनिया के प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है और अपनी तेल तथा गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से प्राप्त करता है। भारत आने वाले अधिकांश ऊर्जा टैंकर हार्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। ऐसे में इस मार्ग का सुरक्षित और निर्बाध संचालन भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आयात लागत और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में शांति कायम रहती है तो भारत सहित एशिया के अनेक देशों को ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है।

दुनिया की नजर अंतिम समझौते पर

हालांकि युद्धविराम और प्रारंभिक शांति समझौते को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन कूटनीतिक हलकों का मानना है कि असली परीक्षा अभी बाकी है। दोनों देशों के बीच लंबित विवादों का स्थायी समाधान ही इस समझौते की सफलता तय करेगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि युद्ध के खतरे से जूझ रही दुनिया को एक बड़ी राहत मिली है। हार्मुज़ जलडमरूमध्य के खुलने, सैन्य कार्रवाई रुकने और शांति वार्ता आगे बढ़ने से वैश्विक बाजारों, ऊर्जा आयातक देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उम्मीद की नई किरण जगी है। यदि वार्ता सफल रहती है तो यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थिरता की नई शुरुआत साबित हो सकता है।

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