जन वाणी न्यूज़
लोनी में सांसद की निष्क्रियता पर बढ़ता जनाक्रोश, लोगों में चर्चा—“जनता के बीच नहीं, समस्याओं से भी दूरी”



अपराध, जनआंदोलनों और विकास के मुद्दों पर अनुपस्थिति को लेकर उठ रहे सवाल, क्षेत्रवासी बोले—“लोनी की आवाज सुनने वाला कौन?”
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
लोनी/गाजियाबाद । लोनी विधानसभा क्षेत्र में गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग को लेकर लोगों के बीच असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। गांवों, कालोनियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों के बीच यह चर्चा आम होती जा रही है कि क्षेत्र लगातार गंभीर घटनाओं और समस्याओं का सामना कर रहा है, लेकिन सांसद की उपस्थिति और सक्रियता कहीं दिखाई नहीं देती। लोगों का कहना है कि हालात ऐसे बन गए हैं कि लोनी स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले कुछ समय में लोनी में हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और अन्य गंभीर अपराधों की अनेक घटनाएं सामने आई हैं। कई मामलों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया, लेकिन इन घटनाओं के बाद पीड़ित परिवारों के बीच सांसद की मौजूदगी देखने को नहीं मिली। लोगों का कहना है कि जब क्षेत्र के परिवार न्याय और सहारे की उम्मीद में संघर्ष कर रहे थे, तब उनका जनप्रतिनिधि उनके बीच नजर नहीं आया।
सबसे अधिक चर्चा गनौली निवासी ओंकार के अपहरण और हत्या कांड को लेकर हो रही है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिला था। मार्ग अवरुद्ध किए गए, धरने हुए, प्रदर्शन हुए और न्याय की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन चलता रहा। लोगों का कहना है कि इतने बड़े जनआंदोलन के बावजूद सांसद न तो पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे और न ही उनकी ओर से कोई ऐसी सक्रियता दिखाई दी, जिसकी लोगों को अपेक्षा थी। इसके अलावा भूमाफियाओं के उत्पीड़न से परेशान आकर मीरपुर हिंदू गांव के किसान सुनील त्यागी द्वारा आत्महत्या करने की दिल दहला देने वाली घटना पर भी संसद की ओर से कोई प्रतिक्रिया न आना भी नागरिकों में चर्चा का विषय है। जबकि इस घटना से गुस्साये लोगों ने घंटों तक दिल्ली सहारनपुर नेशनल हाईवे को जाम किये रखा था।
इसी विषय पर लोग पूर्व सांसद जनरल वी.के. सिंह की सक्रियता की भी चर्चा कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि ओंकार हत्याकांड के दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों, पुलिस आयुक्त तथा शासन स्तर पर लगातार संवाद किया था तथा पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की थी। यही कारण है कि आम लोगों के बीच वर्तमान सांसद अतुल गर्ग और पूर्व सांसद जनरल वी.के. सिंह की कार्यशैली की तुलना भी लगातार सुनाई दे रही है।
लोनी के नागरिकों का कहना है कि सांसद की कथित निष्क्रियता केवल संवेदनशील घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास कार्यों को लेकर भी लोगों में निराशा है। क्षेत्र में सड़क, जल निकासी, यातायात अव्यवस्था, बढ़ती आबादी और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। लोगों का आरोप है कि इन मुद्दों पर भी सांसद की ओर से अपेक्षित रुचि या प्रयास दिखाई नहीं देते।
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेजी से फैल रही है कि सांसद अन्य क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं, जबकि लोनी के मामले में उनका जुड़ाव कमजोर दिखाई देता है। अनेक नागरिकों का कहना है कि लोनी की समस्याओं और जनभावनाओं को वह महत्व नहीं मिल रहा, जिसकी क्षेत्र लंबे समय से अपेक्षा करता रहा है।
आम लोगों के बीच यह धारणा भी सुनाई दे रही है कि पिछले लोकसभा चुनाव में भारी अंतर से मिली जीत के बाद सांसद का ध्यान लोनी क्षेत्र की ओर अपेक्षाकृत कम हो गया है। लोगों का कहना है कि शायद यही कारण है कि यहां की समस्याओं, जनभावनाओं और स्थानीय मुद्दों को वह महत्व नहीं मिल पा रहा, जिसकी जनता अपेक्षा करती है।
नाराजगी केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं बताई जा रही। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ पुराने समर्थक और कार्यकर्ता सांसद की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं। लोगों का कहना है कि सांसद की कथित निष्क्रियता और लोनी की उपेक्षा को लेकर शीर्ष नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।
लोनी में आज सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि जब क्षेत्र अपराध, सामाजिक तनाव और विकास संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब उसका सांसद जनता के बीच कितना दिखाई दे रहा है। यही सवाल अब चौपालों, बाजारों, सामाजिक कार्यक्रमों और जनसभाओं में सुनाई देने लगा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच बढ़ती यह दूरी कम नहीं हुई, तो आने वाले समय में इसका प्रभाव राजनीतिक रूप से भी दिखाई दे सकता है।
