मंडोला विहार में परिषद कार्यालय पर कब्जे की कोशिश का आरोप, सहायक अभियंता ने दर्ज कराई शिकायत

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जन वाणी न्यूज़

मंडोला विहार में परिषद कार्यालय पर कब्जे की कोशिश का आरोप, सहायक अभियंता ने दर्ज कराई शिकायत

नामजद लोगों समेत 10-12 अन्य पर ताला लगाने, धमकाने और कामकाज बाधित करने का आरोप; पुलिस जांच में जुटी

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता जन वाणी

गाजियाबाद/लोनी। ट्रोनिका सिटी थाना क्षेत्र में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के वृत्त कार्यालय पर कथित अवैध कब्जे की कोशिश का मामला सामने आया है। परिषद के सहायक अभियंता दुर्जई राम ने थाना ट्रोनिका सिटी में शिकायत देकर आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने कार्यालय परिसर में घुसकर ताला लगाने का प्रयास किया और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने की कोशिश की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मंडोला विहार योजना के सेक्टर-7 स्थित कार्यालय का मामला

मामला उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के उस वृत्त कार्यालय से जुड़ा है, जो मंडोला विहार योजना के सेक्टर-7 में स्थित है। शिकायत के अनुसार सोमवार सुबह करीब 9:45 बजे कुछ लोग कार्यालय पहुंचे और परिसर पर कब्जा जमाने की नीयत से वहां ताला लगाने लगे।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यह कार्यालय 1 फरवरी 2003 से नियमित रूप से संचालित है और यहां परिषद के प्रशासनिक व विकास संबंधी कार्य किए जाते हैं। ऐसे में कब्जे की कोशिश न केवल अवैध है, बल्कि सरकारी कामकाज में व्यवधान डालने जैसा गंभीर कृत्य भी है।

कई लोगों को नामजद किया गया

सहायक अभियंता द्वारा दी गई तहरीर में महेंद्र त्यागी, गौरव त्यागी उर्फ पप्पी, रामनरेश त्यागी, बॉबी त्यागी समेत 10 से 12 अन्य लोगों को नामजद किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने समूह बनाकर कार्यालय में दबाव बनाने का प्रयास किया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपितों ने कर्मचारियों और अधिकारियों को डराने-धमकाने की कोशिश की, जिससे कार्यालय का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

आरोपितों पर आपराधिक प्रवृत्ति का भी दावा

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया है कि नामजद लोगों के खिलाफ पहले से भी विभिन्न मामले दर्ज बताए जाते हैं। आरोप है कि ये लोग समय-समय पर परिषद कार्यालय में पहुंचकर अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

सरकारी संपत्ति पर कब्जे के प्रयास से उठे सवाल

घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—

यदि कार्यालय वर्षों से संचालित है तो उस पर कब्जे की कोशिश क्यों हुई?

क्या सरकारी भूमि और भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?

क्या पहले भी ऐसे प्रयास हुए थे?

क्या स्थानीय स्तर पर किसी विवाद की अनदेखी की गई?

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी परिसरों पर कब्जे की कोशिशें प्रशासनिक ढिलाई और भू-माफिया मानसिकता को दर्शाती हैं।

कर्मचारियों में दहशत, कामकाज प्रभावित

सूत्रों के अनुसार घटना के बाद परिषद कर्मचारियों में भय और असुरक्षा का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकारी दफ्तर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे तो सामान्य जनता की सुरक्षा का क्या होगा।

बताया जा रहा है कि कुछ समय तक कार्यालय का सामान्य कामकाज भी प्रभावित रहा।

पुलिस बोली—जांच के बाद होगी कार्रवाई

लोनी के एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि सहायक अभियंता की शिकायत पर सोमवार देर शाम मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच की जिम्मेदारी उप निरीक्षक घुम्मन कुमार राणा को सौंपी गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन के लिए चेतावनी जैसी घटना

सरकारी कार्यालय पर कब्जे की कोशिश की यह घटना प्रशासनिक मशीनरी के लिए चेतावनी मानी जा रही है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में अन्य सरकारी परिसरों पर भी दबंगई के प्रयास बढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष

ट्रोनिका सिटी क्षेत्र में परिषद कार्यालय पर कब्जे की कोशिश का मामला केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा, प्रशासनिक सख्ती और कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर बड़ा सवाल है। अब नजर पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।

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