जन वाणी न्यूज़
भूमाफियाओं के दबाव में किसान की मौत से फूटा जनाक्रोश, शव रखकर नेशनल हाईवे जाम
सुसाइड नोट में नामजद आरोपियों पर कार्रवाई की मांग, घंटों ठप रहा दिल्ली-सहारनपुर हाईवे
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
लोनी । क्षेत्र में किसान सुनील कुमार की संदिग्ध आत्महत्या के मामले ने मंगलवार वार को बड़ा जनआंदोलन का रूप ले लिया। मृतक के परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने ट्रॉनिका सिटी थाने के सामने दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर शव रखकर घंटों जाम लगाए रखा। आक्रोशित लोगों ने आरोप लगाया कि भूमाफियाओं और प्रशासनिक दबाव के चलते किसान को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि पहले से दी जा रही शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
जाम के कारण दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता रहा और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
भतीजे ने पुलिस को दी गंभीर शिकायत
मृतक के भतीजे द्वारा पुलिस को सौंपे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि भूमि विवाद और कथित भूमाफियाओं के दबाव से परिवार लंबे समय से परेशान था। शिकायत में दावा किया गया है कि पूर्व में परिवार पर हमला भी हुआ था और इसकी सूचना पुलिस को दी गई थी, लेकिन आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि भूमि संबंधी सर्वे और अभिलेखीय प्रक्रिया के दौरान परिवार की जमीन को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, जिससे मृतक गहरे मानसिक तनाव में था। परिजनों का कहना है कि इसी उत्पीड़न और दबाव के चलते उसने आत्मघाती कदम उठाया।
सुसाइड नोट से बढ़ी मामले की गंभीरता
परिजनों का दावा है कि मृतक एक सुसाइड नोट छोड़ गया है, जिसमें कई लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया गया है। यदि जांच में सुसाइड नोट की पुष्टि होती है तो यह पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है। ग्रामीणों की मांग है कि नोट में जिन लोगों के नाम हैं, उनके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।
डीसीपी देहात ने संभाला मोर्चा
हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ त्रिपाठी ने परिजनों और ग्रामीणों से वार्ता की। काफी देर तक चली बातचीत और कार्रवाई के आश्वासन के बाद कड़ी मशक्कत से लोगों को शांत कराया गया।
कई घंटों तक चले गतिरोध के बाद प्रशासन के आश्वासन पर जाम खोला गया और यातायात सामान्य हो सका। हालांकि ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि यदि आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
क्षेत्र में भारी आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की गई होती तो शायद एक किसान की जान नहीं जाती। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच, नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
अब जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल पुलिस शिकायत, कथित सुसाइड नोट, भूमि विवाद और अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है। आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन किसान की मौत और उसके बाद हुए हाईवे जाम ने प्रशासनिक व्यवस्था, भूमि विवादों और कथित दबंगई पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़ा सवाल
क्या एक किसान वास्तव में भूमाफियाओं और कथित प्रशासनिक दबाव के आगे हार गया, या इसके पीछे कोई और कहानी है? इसका जवाब अब पुलिस जांच और सुसाइड नोट की फोरेंसिक पड़ताल से ही सामने आएगा। फिलहाल किसान की मौत ने पूरे इलाके में आक्रोश और बेचैनी पैदा कर दी है।
