सपना चौधरी को अदालत से अंतरिम संरक्षण, पति के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत पर जारी हुए निर्देश

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जन वाणी न्यूज़ 

सपना चौधरी को अदालत से अंतरिम संरक्षण, पति के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत पर जारी हुए निर्देश

द्वारका महिला अदालत का आदेश; अगली सुनवाई तक संपर्क और नजदीक आने पर रोक, 25 जुलाई को होगी मामले की सुनवाई

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता 

नई दिल्ली। हरियाणा की प्रसिद्ध डांसर, गायिका एवं अभिनेत्री सपना चौधरी द्वारा पति यशवीर उर्फ वीर साहू के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद दिल्ली की द्वारका महिला अदालत ने उन्हें अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। अदालत ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करते हुए अगली सुनवाई तक कई अंतरिम निर्देश जारी किए हैं।

अदालती अभिलेखों के अनुसार सपना चौधरी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि वैवाहिक जीवन के दौरान उन्हें कथित रूप से मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्हें अपना वैवाहिक निवास छोड़कर दिल्ली के नजफगढ़ स्थित अपने मायके में रहना पड़ रहा है। याचिका में भविष्य में किसी प्रकार के विवाद अथवा उत्पीड़न की आशंका भी व्यक्त की गई है।

अदालत ने अंतरिम राहत को आवश्यक माना

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कुछ दस्तावेज, तस्वीरें तथा अन्य सामग्री अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी किए बिना प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री के आधार पर अंतरिम संरक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया।

अदालत ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक प्रतिवादी यशवीर उर्फ वीर साहू याचिकाकर्ता से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी माध्यम से संपर्क नहीं करेंगे। इसके अलावा उन्हें सपना चौधरी के निवास, कार्यस्थल तथा उन सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से भी रोका गया है, जहां उनकी उपस्थिति संभावित हो।

फिल्म प्रीमियर को लेकर भी जताई गई आशंका

याचिका में सपना चौधरी की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी आगामी फिल्म “मोमाकू” का प्रीमियर प्रस्तावित है और कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस पहलू को भी संज्ञान में लेते हुए सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी किए हैं।

घरेलू हिंसा कानून के तहत दायर की गई याचिका

जानकारी के अनुसार यह याचिका महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण प्रदान करने संबंधी कानून के तहत दायर की गई है। ऐसे मामलों में अदालत प्रारंभिक स्तर पर परिस्थितियों का आकलन करते हुए पीड़ित पक्ष को अस्थायी राहत और सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

द्वारका महिला अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई निर्धारित की है। उस दिन दोनों पक्षों की दलीलों, प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी पक्षों पर विस्तृत विचार किया जाएगा। फिलहाल अदालत का यह आदेश अंतरिम प्रकृति का है और मामले के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

 

उल्लेखनीय है कि अदालत ने अभी तक आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। मामले की वास्तविक स्थिति का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण होने और दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही किया जाएगा।

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