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36 घंटे बाद भी डेयरी संचालक का सुराग नहीं, अपहरण कांड से लोनी में दहशत, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
गाजियाबाद। लोनी कोतवाली क्षेत्र में डेयरी संचालक ओमकार के अपहरण की सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। करीब 36 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस अपहृत ओमकार का कोई सुराग लगाने में नाकाम साबित हुई है। बदमाश खुलेआम वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रह गई। घटना के बाद क्षेत्र में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है, जबकि पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
जानकारी के अनुसार लोनी कोतवाली क्षेत्र के खरखड़ी रेलवे अंडरपास के नीचे गनोली गांव निवासी डेयरी संचालक ओमकार पर हमला कर बदमाश उनका अपहरण कर ले गए। वारदात को जिस बेखौफ अंदाज में अंजाम दिया गया, उसने पुलिस की सक्रियता और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद पुलिस की कई टीमें गठित की गईं, लेकिन अब तक न तो अपहृत की बरामदगी हो सकी है और न ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आए हैं।
मामले में सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि घटना से पहले पीड़ित परिवार की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत दी गई थी। परिजनों के अनुसार आरोपियों द्वारा पीड़ित के पुत्र का पीछा किया गया था तथा जान से मारने की धमकी दी गई थी। इस संबंध में 21 मई को लोनी थाने में शिकायत दी गई, लेकिन पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। अब लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस सतर्कता दिखाती और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करती तो शायद इतनी बड़ी वारदात को रोका जा सकता था। यही कारण है कि पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है।
घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब दिनदहाड़े अपहरण जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है और पुलिस केवल घटनाओं के बाद औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नजर आती है। लोगों में इस बात को लेकर भी भय है कि जब पूर्व शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करें।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई है। लापरवाही के आरोप में थाना प्रभारी मुकेश सोलंकी, चिरोड़ी चौकी इंचार्ज और थाने के एसएसआई को निलंबित कर दिया गया है। वहीं पूरे मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। गाजियाबाद के डीआईजी राजकरन नैय्यर ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और जल्द खुलासे का आश्वासन दिया है, लेकिन परिवार और क्षेत्रीय लोग केवल आश्वासनों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।
पीड़ित के पुत्र दिव्यांश का कहना है कि परिवार की किसी से कोई रंजिश नहीं थी और न ही किसी प्रकार का विवाद था। उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से पिता की शीघ्र बरामदगी की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
वहीं लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने भी पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती तो संभवतः यह घटना नहीं घटती। विधायक ने साफ कहा कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
यह सनसनीखेज अपहरण कांड लोनी क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब लोगों की निगाहें पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब तक अपहृत ओमकार सकुशल बरामद होते हैं और पुलिस अपराधियों तक पहुंचने में सफल हो पाती है
