निजी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप, गर्भवती महिला और बच्चे की मौत के बाद हंगामा

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जन वाणी न्यूज़

निजी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप, गर्भवती महिला और शिशु की मौत के बाद हंगामा

ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के अगरौला गांव में परिजनों ने शव रखकर किया प्रदर्शन, अस्पताल के पंजीकरण पर भी उठे सवाल

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता / जन वाणी न्यूज़

लोनी/ट्रॉनिका सिटी। ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के अगरौला गांव स्थित एक निजी अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने रविवार सुबह जमकर हंगामा किया। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ बच्चे की मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने महिला का शव अस्पताल के बाहर रखकर प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और कई घंटे की मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।

जानकारी के अनुसार, रचना (35 वर्ष) पत्नी अप्रमल, मूल रूप से जिला हरदोई के ग्राम परचौली थाना अरवल की निवासी थी और वर्तमान में अगरौला गांव में रमेश के मकान में किराए पर रह रही थी। परिजनों के मुताबिक 6 मई को प्रसव पीड़ा होने पर रचना को अगरौला गांव स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि अस्पताल में कई दिनों तक इलाज के नाम पर महिला की हालत बिगड़ती रही, लेकिन समय रहते उसे किसी बड़े अस्पताल रेफर नहीं किया गया।

परिजनों का कहना है कि 9 मई की रात महिला की हालत अत्यंत गंभीर हो गई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने कथित रूप से करीब 42 हजार रुपये लेने के बाद उसे अस्पताल से बाहर कर दिया। गंभीर हालत में परिजन रचना को दिल्ली स्थित जीटीबी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां करीब तीन घंटे बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया कि जीटीबी अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत लगभग दो दिन पहले ही हो चुकी थी और यदि समय रहते सही उपचार मिलता तो महिला की जान बच सकती थी। परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल की घोर लापरवाही और गलत उपचार के कारण जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हुई।

रविवार सुबह करीब 11 बजे जब परिजन महिला का शव लेकर अगरौला गांव पहुंचे तो गुस्साए लोगों ने शव को निजी अस्पताल के बाहर रखकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के पंजीकरण पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि अस्पताल बिना मानकों के संचालित किया जा रहा है। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए, जिससे तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

सूचना मिलने पर ट्रॉनिका सिटी थाना पुलिस भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन लोग चिकित्सक और अस्पताल संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने तथा कठोर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। कई घंटे तक चले हंगामे और वार्ता के बाद पुलिस ने लोगों को शांत कराया, तब जाकर शव को व

हां से हटाया जा सका।

घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं, जिनकी जांच आवश्यक है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है तथा परिजनों की शिकायत के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

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