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लोनी तहसील में चयनात्मक कार्रवाई पर सवाल: खरखड़ी में छापा, मगर मसूदाबाद-बामला में खुलेआम अवैध खनन जारी
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता जन वाणी
गाजियाबाद/लोनी। लोनी तहसील प्रशासन द्वारा खरखड़ी गांव के जंगल में देर रात छापेमारी कर पांच ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ने और तीन लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई के बाद अब क्षेत्र में चयनात्मक कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने छोटी कार्रवाई दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली, जबकि लोनी तहसील क्षेत्र के मसूदाबाद बामला में रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर अवैध खनन का खेल लगातार जारी है।
बड़ी मशीनों और डंपरों से धरती छलनी
स्थानीय लोगों का कहना है कि मसूदाबाद-बामला क्षेत्र में जेसीबी, पोकलेन मशीनों और भारी डंपरों की मदद से लंबे समय से मिट्टी और खनिज संपदा का अवैध दोहन किया जा रहा है। हालत यह है कि इलाके की भौगोलिक स्थिति तक बदल चुकी है। जहां कभी समतल जमीन और हरियाली थी, वहां अब 25 से 30 फीट तक गहरे गड्ढे बन चुके हैं।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस और संबंधित विभागों से शिकायत की, लेकिन आज तक खनन माफियाओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि जब भी शिकायत की जाती है, कुछ दिन के लिए गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, फिर वही खेल शुरू हो जाता है।
प्रदूषण से त्रस्त ग्रामीण
अवैध खनन और डंपरों की लगातार आवाजाही से क्षेत्र में धूल का गुबार छाया रहता है। इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को सांस संबंधी दिक्कतें, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों की फसलें भी धूल से प्रभावित हो रही हैं।
जलस्तर गिरा, पर्यावरण पर संकट
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार गहरी खुदाई से भूजल स्तर तेजी से नीचे जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के कई हैंडपंप और कुओं का जलस्तर पहले ही प्रभावित हो चुका है। इसके अलावा प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने से पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
वन्य जीवों के जीवन पर भी खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि जंगल और खुले क्षेत्र में लगातार खनन होने से वहां रहने वाले जंगली जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। गहरे गड्ढों और मशीनों की आवाज से उनका जीवन संकट में पड़ गया है।
प्रशासन पर उठे सवाल
लोगों का कहना है कि यदि खरखड़ी में कार्रवाई हो सकती है तो मसूदाबाद-बामला में क्यों नहीं? आखिर किसके संरक्षण में इतने बड़े स्तर पर खनन हो रहा है? क्या खनन माफियाओं के रसूख के आगे प्रशासन बेबस है?
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और शासन से मांग की है कि:
मसूदाबाद-बामला क्षेत्र में तत्काल संयुक्त छापेमारी की जाए
अवैध खनन में लगी मशीनें और डंपर जब्त किए जाएं
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
पर्यावरणीय नुकसान का सर्वे कराया जाए
गहरे गड्ढों को भरवाकर क्षेत्र सुरक्षित कराया जाए
जनता इंतजार में
अब क्षेत्र के लोग इस इंतजार में हैं कि आखिर मसूदाबाद-बामला के खनन माफियाओं पर नकेल कसने का दिन कब आएगा? या फिर कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक ही सीमित रहेगी। जनहित से जुड़ी इस गंभीर समस्या पर प्रशासन की अगली चाल पर सबकी नजरें टिकी हैं।
