गाजियाबाद/लोनी: विवादित भूमि पर अवैध बिजली कनेक्शनों का आरोप, भू-माफिया–विभागीय गठजोड़ पर उठे सवाल

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जन वाणी न्यूज़

गाजियाबाद/लोनी: विवादित भूमि पर अवैध बिजली कनेक्शनों का आरोप, भू-माफिया–विभागीय गठजोड़ पर उठे सवाल

जन वाणी संवाददाता

लोनी । क्षेत्र के ग्राम पावी सादकपुर में विवादित भूमि पर कथित रूप से अवैध बिजली कनेक्शन जारी किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता साबिर अली ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के प्रबंध निदेशक तथा संबंधित अधिशासी अभियंता को लिखित शिकायत भेजकर विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर भू-माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगाया है। मामले ने क्षेत्र में भूमि विवाद, प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

पैतृक भूमि पर कब्जे की कोशिश का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम पावी सादकपुर स्थित खसरा संख्या 1019, 1022, 1023 व 1057 उनकी पैतृक भूमि है, जिस पर कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जे की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि संबंधित लोगों ने खसरा नंबरों में हेराफेरी कर फर्जी मुख्तारनामा (GPA) के आधार पर जमीन की रजिस्ट्रियां भी करवा लीं। शिकायत में कहा गया है कि इस संबंध में राजस्व विभाग स्तर पर पूर्व में आपत्तियां उठाई जा चुकी हैं।

बिजली विभाग पर गंभीर आरोप

प्रार्थना पत्र में पावी बिजलीघर से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों पर बिना स्वामित्व सत्यापन के कनेक्शन जारी करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिन निर्माणाधीन मकानों में अभी छत तक नहीं डली, वहां भी मीटर लगाए गए हैं। इससे संदेह पैदा होता है कि नियमों की अनदेखी कर धन उगाही के जरिए कनेक्शन स्वीकृत किए गए।

यह भी आरोप लगाया गया है कि राजस्व विभाग द्वारा भूमि की निशानदेही किए जाने के बावजूद तथाकथित ‘दीप सिटी कॉलोनी’ क्षेत्र में भारी रिश्वत लेकर कनेक्शन दिए जा रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने उठाई ये मांगें

साबिर अली ने विभाग से मांग की है कि—

खसरा संख्या 1019, 1022, 1023 व 1057 पर दिए गए सभी संदिग्ध/अवैध कनेक्शनों की जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए।

रिश्वत लेकर कनेक्शन देने वाले दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच बैठाई जाए।

विवाद निस्तारण तक संबंधित भूमि पर नए कनेक्शन जारी न किए जाएं।

भविष्य में वास्तविक स्वामित्व और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही कोई कनेक्शन स्वीकृत किया जाए।

साक्ष्य भी किए संलग्न

शिकायतकर्ता ने अपने दावों के समर्थन में लेखपाल की पैमाइश रिपोर्ट, पूर्व में दर्ज IGRS शिकायतों की प्रतियां तथा अन्य दस्तावेज संलग्न करने का दावा किया है।

विभागीय कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामला सामने आने के बाद अब निगाहें विद्युत विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई पर टिक गई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल बिजली कनेक्शन का मामला नहीं, बल्कि भूमि कब्जे को संस्थागत संरक्षण देने जैसा गंभीर प्रकरण माना जाएगा। वहीं यदि शिकायत निराधार हुई तो जांच में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल क्षेत्र में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।

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