डिजिटल निगरानी से कसेगा अपराध पर शिकंजा, मेरठ रेंज में 1 लाख से अधिक अपराधियों का सत्यापन पूरा

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जन वाणी न्यूज़

डिजिटल निगरानी से कसेगा अपराध पर शिकंजा, मेरठ रेंज में 1 लाख से अधिक अपराधियों का सत्यापन पूरा

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता / जन वाणी

मेरठ, 16 अप्रैल। आधुनिक तकनीक के सहारे पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने की दिशा में मेरठ परिक्षेत्र ने बड़ा कदम उठाया है। रेंज कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में ‘ई-साक्ष्य’ और ‘यक्ष’ ऐप के उपयोग को लेकर जमीनी स्तर तक की कार्यप्रणाली को परखा गया। इस दौरान बीट आरक्षियों और उप निरीक्षकों से सीधे संवाद कर न केवल फीडबैक लिया गया, बल्कि सिस्टम को और सुदृढ़ बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए गए।

समीक्षा में यह सामने आया कि ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के जरिए घटनास्थल से जुटाए जाने वाले साक्ष्यों को अब जियो-टैगिंग के साथ डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा रहा है। इससे अदालत में साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और विवेचना की गुणवत्ता में सुधार आएगा। हालांकि कुछ थानों में इसके उपयोग में ढिलाई भी पाई गई, जिस पर सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदार कर्मियों को चेतावनी दी गई और फील्ड ट्रेनिंग तेज करने के निर्देश दिए गए।

वहीं ‘यक्ष’ ऐप को अपराध नियंत्रण का मजबूत हथियार मानते हुए बीट स्तर पर सूचना तंत्र को और सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। बीट आरक्षियों द्वारा फीड की जाने वाली सूचनाओं की गुणवत्ता, उसकी उपयोगिता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि हर कर्मी की ऐप पर आईडी हो और केवल महत्वपूर्ण सूचनाएं ही दर्ज की जाएं, जिससे अनावश्यक डेटा का बोझ न बढ़े।

तकनीकी खामियों को भी गंभीरता से लिया गया। नेटवर्क समस्या और अपलोडिंग में आ रही दिक्कतों को तत्काल दूर करने के लिए संबंधित तकनीकी टीम को सक्रिय किया गया। साथ ही चौकी और थाना प्रभारियों को गलत सूचनाओं को संपादित करने की सुविधा देने पर भी बल दिया गया।

मेरठ रेंज में अपराधियों के सत्यापन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब तक कुल 1,01,792 अपराधियों का सत्यापन किया जा चुका है, जो क्षेत्रीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत है। इसके अलावा 5,863 ग्राम और मोहल्लों का डाटा शत-प्रतिशत फीड कर लिया गया है, जिससे हर इलाके की निगरानी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संभव हो गई है।

स्पष्ट संदेश दिया गया कि तकनीक अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। साक्ष्यों के डिजिटलीकरण और बीट स्तर पर जवाबदेही तय होने से कानून-व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलने का रास्ता भी आसान होगा।

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