जन वाणी न्यूज़
लोनी में ‘चौथे स्तंभ’ पर दाग: पत्रकारिता की आड़ में ठगी, 90 हजार हड़पे; मुकदमा दर्ज, आरोपी फरार
महिला पत्रकार का आरोप—पैसे मांगे तो गाली-गलौज, फर्जी माइक आईडी से करते थे अवैध वसूली
रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक जन वाणी

गाजियाबाद (लोनी)। पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे की आड़ लेकर ठगी और कथित ब्लैकमेलिंग का एक अति संवेदनशील मामला सामने आया है। महिला पत्रकार प्रीति चतुर्वेदी ने कथित पत्रकार विमल स्वामी और उसकी पत्नी दीपाली पर 90 हजार रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। पीड़िता की लिखित शिकायत पर अंकुर विहार थाने में जांच के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
पीड़िता का आरोप है कि दोनों आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली पत्रकार बताकर विश्वास में लिया और योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग बहानों से 90 हजार रुपये ऐंठ लिए। जब उसे पूरे मामले में फ्रॉड का आभास हुआ और उसने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने न सिर्फ टालमटोल की बल्कि गाली-गलौज करते हुए झगड़े पर उतारू हो गए।
पीड़िता ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि दोनों आरोपी फर्जी माइक आईडी रखते हैं, जिनका इस्तेमाल कर वे लोगों पर प्रभाव जमाते हैं और इसी आधार पर अवैध वसूली करते हैं। उसके अनुसार, यह कोई एकल घटना नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क भी हो सकता है। पीड़िता ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस का कहना है कि मामले की प्रारंभिक जांच के बाद आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू पर गहन जांच की जा रही है, साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि लोनी क्षेत्र में कुछ तथाकथित पत्रकारों द्वारा लंबे समय से पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली और डराने-धमकाने का खेल चल रहा है, जिससे पूरे पेशे की साख पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का यह भी कहना है कि ऐसी घटनाओं से न सिर्फ आम जनता का भरोसा टूटता है, बल्कि ईमानदारी से काम कर रहे वास्तविक पत्रकारों की छवि भी धूमिल होती है।
विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि फर्जी पत्रकारों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि ‘चौथे स्तंभ’ की गरिमा सुरक्षित रह सके और समाज में भरोसा कायम रहे।
फिलहाल पुलिस टीमें आरोपियों की तलाश में लगातार जुटी हैं और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है। यह मामला एक बार फिर संकेत दे रहा है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्रकारिता के नाम पर पनप रही यह प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।