भाजपा सम्मेलन में हंगामे से उठे गंभीर सवाल: महिला सम्मान, संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस तेज

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जन वाणी न्यूज़

भाजपा सम्मेलन में हंगामे से उठे गंभीर सवाल: महिला सम्मान, संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस तेज

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता

मोदीनगर/गाजियाबाद। भारतीय जनता पार्टी के “विकसित भारत संकल्प सम्मेलन” में महिला कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध और हंगामे ने न केवल कार्यक्रम की गरिमा को प्रभावित किया, बल्कि संगठन के भीतर महिला सम्मान, शिकायतों के निस्तारण और जवाबदेही को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मामला उस कथित अभद्र टिप्पणी से जुड़ा है, जिसे लेकर भाजपा की महिला कार्यकर्ता और पदाधिकारी पिछले कई महीनों से कार्रवाई की मांग कर रही हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोदीनगर में आयोजित सम्मेलन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं ने जिला उपाध्यक्ष नितिन मित्तल के खिलाफ कथित अश्लील टिप्पणी के मामले में कार्रवाई न होने पर खुलकर विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम में पश्चिम उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। जैसे ही उनका संबोधन शुरू हुआ, महिला कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रकट किया और संगठन के वरिष्ठ नेताओं से जवाब मांगा।

तीन माह बाद भी कार्रवाई नहीं, बढ़ा असंतोष

महिला कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुछ समय पूर्व एक व्हाट्सएप समूह में भाजपा की एक महिला नेत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणी की गई थी। इस मामले में मोदीनगर थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि शिकायत दर्ज होने और तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।

महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी महिला की गरिमा से जुड़े मामले में भी संगठन और प्रशासन स्तर पर त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तो इससे गलत संदेश जाता है। यही कारण रहा कि सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उनका आक्रोश खुलकर सामने आया।

मंच से विरोध, क्षेत्रीय अध्यक्ष का कड़ा रुख

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध बढ़ने पर क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती। बताया जाता है कि उन्होंने अपना संबोधन बीच में ही समाप्त कर दिया और कार्यक्रम स्थल से चले गए।

सिसोदिया ने यह भी कहा कि यदि किसी कार्यकर्ता को शिकायत थी तो उसे संगठनात्मक मंचों के माध्यम से उठाया जाना चाहिए था। हालांकि महिला कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जब लंबे समय तक शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती, तब विरोध दर्ज कराना मजबूरी बन जाता है।

विधायक ने बताया राजनीतिक साजिश, आलाकमान तक जाएगी शिकायत

भाजपा विधायक डॉ. मंजू शिवाच ने घटना को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि सम्मेलन में हुआ हंगामा सुनियोजित प्रतीत होता है। उन्होंने संकेत दिया कि पूरे प्रकरण की शिकायत पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई जाएगी।

वहीं दूसरी ओर, विरोध कर रही महिला कार्यकर्ताओं ने अपना आरोप दोहराते हुए कहा कि मूल मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि महिला सम्मान और न्याय का है। उनका कहना है कि जब तक आरोपों की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं होगी, तब तक असंतोष बना रहेगा।

संगठन के सामने दोहरी चुनौती

यह पूरा घटनाक्रम भाजपा संगठन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी करता है। एक ओर पार्टी लगातार महिला सशक्तिकरण और महिला सम्मान को अपनी प्राथमिकता बताती रही है, वहीं दूसरी ओर उसके ही कार्यक्रम में महिला कार्यकर्ताओं का खुलकर विरोध करना संगठनात्मक तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मामला केवल अनुशासनहीनता मानकर समाप्त कर दिया गया तो मूल शिकायत पीछे छूट सकती है। वहीं यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो इससे संगठन की विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है।

सबसे बड़ा प्रश्न

इस पूरे विवाद के केंद्र में एक ही सवाल है—क्या महिला कार्यकर्ताओं द्वारा उठाई गई शिकायतों पर समयबद्ध और पारदर्शी कार्रवाई हुई? यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? और यदि कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है, तो उसकी जानकारी संबंधित पक्षों को क्यों नहीं दी गई?

फिलहाल मोदीनगर का यह घटनाक्रम भाजपा के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है। महिला कार्यकर्ताओं का विरोध, वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और शिकायतों की गूंज अब स्थानीय राजनीति से निकलकर संगठनात्मक जवाबदेही के बड़े विमर्श का रूप लेती दिखाई दे रही है।

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