गाजियाबाद में ‘जनता दर्शन’ बना न्याय का दरबार: विधवा महिला को मिला हक, डीएम की तत्परता बनी मिसाल

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जन वाणी न्यूज़

गाजियाबाद में ‘जनता दर्शन’ बना न्याय का दरबार: विधवा महिला को मिला हक, डीएम की तत्परता बनी मिसाल

एक फोन कॉल में सुलझा जमीनी विवाद, पीड़िता ने कहा—“अब मिला इंसाफ”

वरिष्ठ संवाददाता / जन वाणी न्यूज़

गाजियाबादक्ष। जनपद में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ की जनसुनवाई व्यवस्था एक बार फिर आम जनता के लिए भरोसे का केंद्र बनकर उभरी है। खंजरपुर, मोदीनगर निवासी विधवा महिला श्रीमती रेखा चौधरी ने अपनी पुत्री के साथ ‘जनता दर्शन’ में पहुंचकर अपने जेठ के साथ चल रहे जमीनी विवाद में न्याय की गुहार लगाई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए तहसीलदार मोदीनगर को अगले ही दिन उपस्थित होने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित पक्ष से दूरभाष पर सीधे संपर्क कर पूरे प्रकरण की गहन जानकारी ली और मौके पर ही गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित कराया।

प्रशासनिक सक्रियता का असर: पीड़िता को मिला त्वरित न्याय

जिलाधिकारी की तत्परता का परिणाम यह रहा कि लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान बेहद कम समय में हो गया। पीड़िता रेखा चौधरी और उनकी पुत्री ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार लगा कि प्रशासन वास्तव में आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील है।

महिला ने भावुक होकर कहा कि यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं होता, तो उन्हें न्याय मिलने में और लंबा समय लग सकता था।

जनता दर्शन’ बना आमजन की उम्मीद

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ द्वारा नियमित रूप से आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम अब जिले में आम नागरिकों के लिए एक सशक्त मंच बनता जा रहा है। यहां बिना किसी औपचारिकता के लोग सीधे अपनी समस्याएं प्रशासन के शीर्ष अधिकारी के सामने रख सकते हैं और त्वरित समाधान पा सकते हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर निर्देश देकर समस्याओं का निस्तारण कराने की यह कार्यशैली न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि जनता में विश्वास भी मजबूत कर रही है।

महिलाओं के लिए संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया कि प्रशासन ने एक विधवा महिला की समस्या को प्राथमिकता देते हुए उसे त्वरित न्याय दिलाया। यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन विशेष रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

आम जनता से अपील

पीड़िता और उनकी पुत्री ने अन्य नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी को भी कोई समस्या है, तो वह एक बार जिलाधिकारी से अवश्य मिलें। उन्होंने कहा कि “जनता दर्शन” के माध्यम से उन्हें न केवल सुना गया, बल्कि त्वरित और निष्पक्ष न्याय भी मिला।

गाजियाबाद प्रशासन की यह पहल सुशासन और जवाबदेही का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। जिलाधिकारी की सक्रियता और संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो प्रशासनिक स्तर पर आम नागरिकों को समयबद्ध और प्रभावी न्याय दिलाया जा सकता है।

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