लोनी में भक्ति का महासंगम: शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय जन्म और तारकासुर वध प्रसंग के साथ गूंज उठी श्रीरामकथा

0
1

जन वाणी न्यूज़

लोनी में भक्ति का महासंगम: शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय जन्म और तारकासुर वध प्रसंग के साथ गूंज उठी श्रीरामकथा

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता जन वाणी न्यूज़

लोनी (गाजियाबाद), 17 अप्रैल। रामपार्क स्थित सिद्ध बाबा मंदिर के समक्ष आयोजित श्रीरामकथा का तीसरा दिन आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना के उत्कर्ष का साक्षी बना। कथा व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य अतुल कृष्ण भारद्वाज जी ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह, भगवान कार्तिकेय के अवतरण तथा दैत्य तारकासुर के वध का अत्यंत भावपूर्ण, मार्मिक और ओजपूर्ण वर्णन किया। उनके श्रीमुख से निकली कथा ने श्रद्धालुओं को भक्ति के ऐसे सागर में डुबो दिया, जहां हर श्रोता भावविभोर नजर आया।

कथा के दौरान जैसे ही शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग आया, पूरा पांडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। वहीं कार्तिकेय जन्म और तारकासुर वध की गाथा ने धर्म और अधर्म के शाश्वत संघर्ष की जीवंत अनुभूति कराई। कथा का प्रत्येक प्रसंग न केवल धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ करता रहा, बल्कि समाज को एकजुटता और धर्मनिष्ठा का संदेश भी देता चला गया।

भजनों पर झूमे श्रद्धालु, विधायक भी बने भक्ति रंग में सराबोर
कथा के उपरांत आयोजित भजन-कीर्तन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मधुर भजनों की धुन पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसी बीच लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर भी स्वयं को भक्ति रस में डूबने से रोक नहीं सके और भक्तों के साथ झूमते हुए नजर आए। उनका यह सहज और आत्मीय रूप लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

संतों का सान्निध्य, आशीर्वाद और सामाजिक संदेश
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर परमहंस दाती महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और ऊंचाई प्रदान की। संतों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद ग्रहण करते हुए समाज में धर्म, सेवा और संस्कारों के प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने विधायक नंदकिशोर गुर्जर द्वारा किए जा रहे गौसेवा कार्यों की खुलकर सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

“लोनी में बह रही है आस्था की गंगा” — नंदकिशोर गुर्जर
विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने अपने संबोधन में कहा कि लोनी की पावन धरा पर श्रीरामकथा गंगा के समान प्रवाहित हो रही है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरण और सनातन मूल्यों के पुनर्स्थापन का महापर्व बन चुका है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माताओं और बहनों की भारी भागीदारी इस आयोजन में देखने को मिल रही है, वह हमारी संस्कृति की जीवंतता और मजबूती का प्रतीक है।

एकता, आस्था और संस्कृति का विराट संदेश
तीसरे दिन का यह आयोजन स्पष्ट संकेत दे गया कि श्रीरामकथा केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली शक्ति है। यहां उमड़ी जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि आज भी सनातन परंपराएं समाज के केंद्र में हैं और लोगों के जीवन में गहराई से रची-बसी हैं।

लोनी की धरती पर चल रही यह श्रीरामकथा न केवल आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रही है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव का भी नया अध्याय लिख रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here