मंडोला के किसानों का फूटा गुस्सा: ‘वायदाखिलाफी’ पर आर-पार की चेतावनी, 27 मई से 72 घंटे की निर्णायक पंचायत का ऐलान

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मंडोला के किसानों का फूटा गुस्सा: ‘वायदाखिलाफी’ पर आर-पार की चेतावनी, 27 मई से 72 घंटे की निर्णायक पंचायत का ऐलान

जन वाणी संवाददाता

मुजफ्फरनगर (सिसौली) । मंडोला विहार योजना से प्रभावित किसानों का धैर्य अब जवाब देता नजर आ रहा है। वर्षों से अपनी जमीन, हक और पुनर्वास की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों ने अब आंदोलन को निर्णायक मोड़ देने का संकेत दे दिया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान सिसौली में आयोजित मासिक पंचायत में पहुंचे और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के सामने अपनी पीड़ा खुलकर रखी।

किसानों ने आरोप लगाया कि आवास विकास परिषद के अधिकारी वार्ता का रास्ता छोड़कर अब आंदोलन को कुचलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। प्रभावित किसानों का कहना है कि फर्जी मुकदमे दर्ज कर, दबाव बनाकर और धमकाकर आंदोलन को खत्म करने की साजिश रची जा रही है।

मांगें जस की तस, समाधान शून्य

किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें कोई नई नहीं हैं, बल्कि वर्षों से लंबित हैं। प्रमुख मांगों में:

भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत पुनर्वास व पुनर्स्थापन के सभी लाभ दिए जाएं

विकसित प्लॉट में की गई 10% भूमि कटौती को मिश्रित भू-उपयोग के साथ वापस दिया जाए

वर्ष 1981-82 में ग्राम पंचायत मंडोला द्वारा गरीबों को दिए गए आवासीय प्लॉट अर्जन से मुक्त किए जाएं

आबादी उपयोग की भूमि, डिग्री कॉलेज व इंटर कॉलेज की जमीन को भी अधिग्रहण से बाहर किया जाए

किसानों का आरोप है कि इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने के बजाय अधिकारी पिछले 10 वर्षों से आंदोलन को टालने और कमजोर करने में लगे हैं।

टिकैत का सीधा संदेश: “अब नहीं चलेगी अनदेखी”

पंचायत में बोलते हुए चौधरी राकेश टिकैत ने साफ कहा कि पिछले वर्ष मंडोला विहार योजना की पंचायत में अधिकारियों ने जल्द समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि प्रशासन किसानों की समस्याएं सुलझाने के बजाय यह सोच रहा है कि “बिना कुछ दिए आंदोलन कैसे खत्म कराया जाए”, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

अब निर्णायक लड़ाई की तैयारी

किसानों के मुद्दों की अनदेखी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए टिकैत ने बड़ा ऐलान किया—
27 मई से जिला कलेक्ट्रेट गाजियाबाद पर 72 घंटे की विशाल किसान पंचायत आयोजित की जाएगी, जो आंदोलन की दिशा और दशा तय करेगी।

ग्रामीणों में उबाल, नेतृत्व एकजुट

इस दौरान किसान आंदोलन मंडोला के संयोजक मास्टर महेंद्र सिंह त्यागी समेत बिल्लू प्रधान, नीरज त्यागी, राजबीर त्यागी, राजन त्यागी, सुगम त्यागी और गौरव भगत सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि अब भी समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

स्पष्ट है कि मंडोला के किसानों का यह संघर्ष अब केवल मुआवजे या प्लॉट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। 27 मई की पंचायत प्रशासन और किसानों के बीच टकराव की नई कहानी लिख सकती है।

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