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लोनी रामकथा में उमड़ा जनसैलाब, भक्ति की धारा में बहा जन-जन, सामाजिक एकता का दिखा विराट स्वरूप
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ / संवाददाता जन वाणी न्यूज़
लोनी । पालिका क्षेत्र की रामपार्क एक्सटेंशन कॉलोनी स्थित पावन परिसर में चल रही श्रीरामकथा के दूसरे दिन आस्था, श्रद्धा और जनसहभागिता का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर कर दिया। अप्रैल की इस सुहानी संध्या में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को एक दिव्य और ऐतिहासिक आयाम प्रदान कर दिया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने पहुंचकर भगवान श्रीराम के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए तथा कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। उनके आगमन से आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया, वहीं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने लोनी में निकली भव्य कलश यात्रा की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि हजारों मातृशक्ति का अनुशासित, संयमित और श्रद्धा से परिपूर्ण सहभाग इस आयोजन को केवल धार्मिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का महोत्सव बना देता है। यह दृश्य भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है, जहां आस्था और अनुशासन एक साथ चलते हैं।
अपने संबोधन में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि लोनी की यह कलश यात्रा इतनी विराट और भव्य रही कि इसकी गूंज दूर-दराज तक सुनाई दे रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती देते हैं और युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। वहीं ब्रजेश पाठक ने कहा कि लोनी में व्याप्त रामभक्ति का यह वातावरण पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह आयोजन सामाजिक समरसता, भाईचारे और एकजुटता का सशक्त संदेश दे रहा है।
व्यासपीठ से प्रसिद्ध कथावाचक ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण, मार्मिक और जीवंत चित्रण किया। उनके मधुर और ओजपूर्ण प्रवचन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा के दौरान कई श्रद्धालु भावुक होकर भक्ति में लीन नजर आए, वहीं “हर-हर महादेव” और “जय श्रीराम” के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित भजन-कीर्तन ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। देर रात तक श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे, मानो पूरा क्षेत्र एक आध्यात्मिक उत्सव में परिवर्तित हो गया हो।
इस आयोजन में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। यह रामकथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कारों को सशक्त करने और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।
लोनी की यह रामकथा अब केवल एक कथा नहीं रही, बल्कि आस्था, एकता और भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक बनती जा रही है।