जन वाणी न्यूज़
गाजियाबाद में महिला नेतृत्व को नई धार
रिपोर्टिंग चौकी साहिबाबाद की कमान 2019 बैच की तेजतर्रार उपनिरीक्षक पूनम को, लंबे समय से खाली थी चौकी
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
गाजियाबाद। पुलिस कमिश्नरेट ने महिला थाना की रिपोर्टिंग चौकी साहिबाबाद पर 2019 बैच की उपनिरीक्षक पूनम को चौकी प्रभारी नियुक्त कर एक स्पष्ट संदेश दिया है—ईमानदारी और जांबाजी को अब नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलेगी। लंबे समय से खाली चल रही इस चौकी पर उनकी तैनाती को प्रशासनिक सक्रियता और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
न्यायालय परिसर से अकेले वारंटी की गिरफ्तारी, यहीं से बनी पहचान
उपनिरीक्षक पूनम उस समय चर्चा में आईं जब उन्होंने न्यायालय परिसर से एक वारंटी को अकेले ही जद्दोजहद के बाद गिरफ्तार किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपी गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पूनम ने साहस और सूझबूझ से उसे दबोच लिया। इस घटना ने उन्हें जिले में एक जांबाज, निर्भीक और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की पहचान दिलाई।
पुलिस महकमे में उनकी छवि एक ऐसी अधिकारी की है जो दबाव में झुकती नहीं और कानून के अनुपालन में समझौता नहीं करती।
खाली चौकी को मिली नई ऊर्जा
रिपोर्टिंग चौकी साहिबाबाद लंबे समय से प्रभारी विहीन थी, जिससे क्षेत्र में प्रशासनिक समन्वय प्रभावित हो रहा था। स्थानीय लोगों की शिकायतें और महिला संबंधी प्रकरणों के निस्तारण में भी सुस्ती देखी जा रही थी। ऐसे में पूनम की तैनाती को व्यवस्था में नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि महिला थाना से जुड़े मामलों में एक सशक्त महिला अधिकारी की मौजूदगी पीड़िताओं के विश्वास को मजबूत करेगी और शिकायत दर्ज कराने की झिझक कम होगी।
भ्रष्टाचार की पृष्ठभूमि और सख्त संदेश
गौरतलब है कि इससे पहले इसी चौकी की प्रभारी रहीं भुवनेश्वरी को अपराध निरोधक टीम ने रिश्वत के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उस घटना ने पुलिस विभाग की साख पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे संवेदनशील पद पर पूनम जैसी ईमानदार छवि वाली अधिकारी की नियुक्ति को विभाग की छवि सुधारने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
महिला नेतृत्व और कानून व्यवस्था पर प्रभाव
पुलिस व्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नेतृत्व की जिम्मेदारी में भी दिख रही है। पूनम की नियुक्ति यह संकेत देती है कि प्रशासन अब कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों को अग्रिम पंक्ति में लाने के मूड में है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि उनकी कार्यशैली पूर्ववत सख्त और निष्पक्ष रही, तो क्षेत्र में वारंटियों और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई देखने को मिलेगी।
चुनौतियां भी कम नहीं
साहिबाबाद क्षेत्र औद्योगिक, व्यावसायिक और घनी आबादी वाला इलाका है। यहां महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ और पारिवारिक विवादों के मामले बड़ी संख्या में आते हैं। ऐसे में चौकी प्रभारी के रूप में पूनम के सामने त्वरित कार्रवाई, संवेदनशीलता और सख्ती—तीनों का संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।
निष्कर्ष: ईमानदारी को मिली कमान
उपनिरीक्षक पूनम की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि जांबाजी और ईमानदारी की पहचान रखने वाले अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि वह अपनी तेजतर्रार छवि को जमीनी कार्रवाई में किस तरह ढालती हैं और रिपोर्टिंग चौकी साहिबाबाद को कानून व्यवस्था के मॉडल के रूप में स्थापित कर पाती हैं या नहीं।
