रटोल क्षेत्र के पिछड़ेपन पर गरजी आवाजें, राष्ट्रीय देहात मोर्चा की विचार गोष्ठी में विकास मॉडल पर उठे सवाल

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

रटोल क्षेत्र के पिछड़ेपन पर गरजी आवाजें, राष्ट्रीय देहात मोर्चा की विचार गोष्ठी में विकास मॉडल पर उठे सवाल

शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और किसानों की बदहाल व्यवस्था पर चिंता; पंचायतों को अधिकार देने और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की उठी मांग

बागपत, 1 फरवरी 2026 । राष्ट्रीय देहात मोर्चा द्वारा विद्या पब्लिक स्कूल, डगरपुर में “विकास में रटोल क्षेत्र के पिछड़ेपन की समीक्षा” विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल स्थिति, संसाधनों के असमान वितरण और सरकारी नीतियों पर तीखी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में देहाती समाज के उल्लेखनीय योगदान के बावजूद आज भी ग्रामीण इलाकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव प्रिंसिपल मन्तराम नागर ने कहा कि रटोल क्षेत्र का आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान रहा, लेकिन सत्ताधारी सरकारों की नीतियों के कारण यह इलाका विकास की दौड़ में पीछे छूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के लोग आज भी शिक्षा, चिकित्सा और परिवहन जैसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं, जबकि किसानों को फसल और पशुपालन का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए पर्याप्त मंडी व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि पंचायती राज कानून लागू होने के बावजूद पंचायतों को प्रशासनिक अधिकार नहीं मिल पाए हैं, जिससे ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है। साथ ही देहात में बढ़ते भ्रष्टाचार पर भी चिंता जताई।

केंद्रीय संचालन समिति के सदस्य और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विजेंद्र कसाना ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि कभी भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा था, लेकिन समय के साथ राजनीतिक और प्रशासनिक बदलावों ने ग्रामीण समाज को हाशिये पर पहुंचा दिया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलनों में क्षेत्र की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभक्तों के बलिदान के बाद भी ग्रामीण नागरिकों को अपेक्षित अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

केंद्रीय संचालन समिति के सदस्य एडवोकेट गजेंद्र सिंह बली ने कहा कि संविधान बनने के बाद भी एक बड़ा वर्ग अपने अधिकारों से वंचित रह गया, जबकि सीमित समूह संसाधनों और राजनीति पर हावी हो गया। उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति, सामाजिक जागरूकता की कमी और चुनावी प्रक्रियाओं में बढ़ती कुरीतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

गोष्ठी के दौरान संगठन विस्तार की घोषणा करते हुए प्रवीण बैसला को खेकड़ा ब्लॉक का संयोजक नियुक्त किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दारोगा नवल सिंह बैंसला ने की, जबकि संचालन बागपत देहात शिक्षक मोर्चा के जिला संयोजक वेदप्रकाश बैसला (भेड़ापुर) ने किया। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम सिंह निरोजपुर, एडवोकेट मुनीराम कसाना, ओमवीर गुर्जर, बबलू कसाना, आजाद सैनी, इंद्रपाल घिटोरा, राजेंद्र सिंह, मनिंदर पंवार, सौरभ बैंसला, बलराज सिंह सहित अनेक वक्ताओं ने विचार रखे। कार्यक्रम में शैलेंद्र कुमार, जयप्रकाश पहलवान, ऋषिराज, बाबू आजाद सिंह, सचिन, ऋषिपाल, कपिल ज्ञानी और सोनू प्रधान समेत क्षेत्र के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

गोष्ठी का संदेश स्पष्ट रहा—ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास, संसाधनों के समान वितरण और पंचायतों को मजबूत अधिकार दिए बिना संतुलित विकास की परिकल्पना अधूरी है। वक्ताओं ने सरकार और प्रशासन से ग्रामीण बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देने की मांग की, ताकि देहात और शहर के बीच बढ़ती खाई को पाटा जा सके।

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