राष्ट्रीय पक्षी की संदिग्ध मौत से सनसनी, पचायरा में आधा दर्जन से अधिक मोर मृत, ग्रामीणों ने जहर देने का लगाया आरोप 

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जन वाणी न्यूज़

राष्ट्रीय पक्षी की संदिग्ध मौत से सनसनी

पचायरा में आधा दर्जन से अधिक मोर मृत, ग्रामीणों ने जहर देने का लगाया आरोप

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद के लोनी क्षेत्र अंतर्गत थाना ट्रोनिका सिटी के ग्राम पचायरा में राष्ट्रीय पक्षी मोर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। एक साथ आधा दर्जन से अधिक मोरों के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है।

घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और पूरे प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का आरोप: मोरों को जहर देकर मारा गया

स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि मोरों को जानबूझकर जहर देकर मारा गया है। उनका कहना है कि जिस प्रकार एक साथ कई मोरों की मौत हुई है, वह सामान्य या प्राकृतिक घटना प्रतीत नहीं होती।

ग्रामीणों ने मांग की है कि मृत मोरों का विधिवत पोस्टमार्टम कराया जाए, नमूनों की वैज्ञानिक जांच हो और यदि जहर देने की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि राष्ट्रीय पक्षी की हत्या किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

प्रशासन का पक्ष: जांच जारी, रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। पुलिस और संबंधित विभागों ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, प्रथम दृष्टया मौत के कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम और प्रयोगशाला जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत बीमारी, विषाक्त आहार, पर्यावरणीय कारण या किसी अन्य वजह से हुई है।

वन विभाग का पक्ष: हर पहलू की जांच

वन विभाग की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक साथ कई पक्षियों की मृत्यु के पीछे संक्रामक रोग, जहरीला दाना-पानी या पर्यावरणीय प्रदूषण जैसे कारण हो सकते हैं।

वन विभाग का कहना है कि मृत मोरों के नमूने परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे और आसपास के क्षेत्र, जल स्रोतों तथा खेतों में उपयोग किए जा रहे रसायनों की भी जांच की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रहस्यमय परिस्थितियां: तथ्य क्या कहते हैं?

फिलहाल यह स्पष्ट है कि मोरों की मौत रहस्यमय परिस्थितियों में हुई है। न तो आधिकारिक रूप से जहर देने की पुष्टि हुई है और न ही किसी बीमारी की। ऐसे में मामला पूरी तरह जांच पर निर्भर है।

ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, वहीं प्रशासन और वन विभाग वैज्ञानिक जांच के बाद ही निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कह रहे हैं।

कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी

मोर राष्ट्रीय पक्षी है और संरक्षित वन्यजीव की श्रेणी में आता है। ऐसे में उसकी संदिग्ध मौत केवल स्थानीय घटना नहीं, बल्कि कानूनी और नैतिक रूप से अत्यंत गंभीर विषय है।

यदि यह साबित होता है कि मोरों को जहर देकर मारा गया, तो यह न केवल वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन होगा, बल्कि समाज के प्रति भी एक अपराध होगा।

निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग

पचायरा में मोरों की सामूहिक मौत ने पूरे क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है। ग्रामीण निष्पक्ष जांच, पोस्टमार्टम और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन और वन विभाग जांच का भरोसा दे रहे हैं।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष होती है। राष्ट्रीय पक्षी की मौत का सच सामने आना ही चाहिए — क्योंकि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था, पर्यावरण और कानून — तीनों की परीक्षा है।

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