लोनी में 2027 से पहले ही सियासी रण सज चुका है: दिग्गजों की सक्रियता ने चुनाव को बना दिया प्रतिष्ठा की जंग

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

लोनी में 2027 से पहले ही सियासी रण सज चुका है: दिग्गजों की सक्रियता ने चुनाव को बना दिया प्रतिष्ठा की जंग

गठबंधन हो या न हो, लोनी विधानसभा में चार प्रभावशाली चेहरों की दावेदारी से गर्माया माहौल; हर रणनीति एक मजबूत धुरी के इर्द-गिर्द घूमती दिख रही

लोनी (गाजियाबाद)।
विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर हैं, लेकिन लोनी विधानसभा क्षेत्र में राजनीति पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। क्षेत्र में जिस तरह से दिग्गज नेताओं की सक्रियता बढ़ी है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह चुनाव सामान्य नहीं, बल्कि बेहद कांटे का, संघर्षपूर्ण और प्रतिष्ठा से जुड़ा होगा।
सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है और हर नेता अपने-अपने स्तर पर जमीन मजबूत करने में जुटा हुआ है।

मदन भैया: नाम आते ही बदल जाती है पूरी तस्वीर

सूत्रों के मुताबिक पश्चिम उतर प्रदेश कद्दावर नेता और रालोद विधायक मदन भैया की संभावित एंट्री ने लोनी की राजनीति को नई दिशा दे दी है। चार बार खेकड़ा विधानसभा से विधायक रहे मदन भैया का लोनी क्षेत्र में पुराना प्रभाव रहा है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनका नाम सामने आते ही पूरा चुनावी विमर्श उसी धुरी पर केंद्रित हो गया है। अंदरखाने की सियासत में यह चर्चा आम है कि लोनी में खड़ा हर संभावित उम्मीदवार अपनी रणनीति मदन भैया को ध्यान में रखकर ही तैयार कर रहा है, क्योंकि उन्हें ही चुनाव का सबसे मजबूत फैक्टर माना जा रहा है।

नंदकिशोर गुर्जर: सत्ता की निरंतरता बनाम चुनौती

वर्तमान भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर लगातार दो बार लोनी विधानसभा जीत चुके हैं और तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाने के इरादे से मैदान में हैं।
उनकी मुखर शैली, संगठन पर पकड़ और समर्थक वर्ग उन्हें मजबूत स्थिति में रखता है, लेकिन बदले हुए राजनीतिक समीकरण और दिग्गजों की संभावित एंट्री ने मुकाबले को और कठिन बना दिया है।

अनिल कसाना: देहात की सियासत से विधानसभा तक की तैयारी

ब्लॉक प्रमुख अनिल कसाना लोनी की राजनीति में एक मजबूत और उभरता हुआ चेहरा बनकर सामने आए हैं। ब्लॉक प्रमुख रहते हुए उन्होंने देहात क्षेत्र में सड़क, पानी, बिजली, नाली, इंटरलॉकिंग जैसे विकास कार्य कराकर ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस जनाधार बनाया।
वे जिला पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं और उस दौरान भी विकास कार्यों को लेकर उनकी सक्रिय भूमिका रही।
मिलनसार स्वभाव, पढ़े-लिखे और युवा नेता की छवि तथा हर व्यक्ति के सुख-दुख में शामिल रहने की आदत उन्हें राजनीतिक के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी मजबूत बनाती है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनकी तैयारियां भी सबसे मजबूत सियासी चुनौती को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही हैं।

मनोज धामा: हर हाल में मैदान में उतरने के संकेत

लोनी नगर पालिका अध्यक्ष रंजीता धामा के पति और रालोद नेता मनोज धामा को लेकर सूत्रों के हवाले से यह साफ कहा जा रहा है कि गठबंधन हो या न हो, वे लोनी विधानसभा से चुनाव अवश्य लड़ेंगे—दल कोई भी हो सकता है।
नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में रंजीता धामा की लगातार दूसरी बार बड़े अंतर से जीत और स्वयं मनोज धामा का पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रहना, उन्हें शहरी क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक आधार देता है।

अंदरखाने की सियासत का बड़ा संकेत

लोनी की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर यह संकेत दे रही है कि भले ही उम्मीदवार कई हों, लेकिन हर दावेदार अपने स्तर पर एक ही बड़े राजनीतिक कद को मानक मानकर चल रहा है।
रणनीति, जनसंपर्क, जातीय संतुलन और संगठनात्मक गणित—सब कुछ उसी हिसाब से साधा जा रहा है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर लोनी विधानसभा में 2027 का चुनाव अभी से सियासी शतरंज बन चुका है। यहां न तो कोई मुकाबला आसान है और न ही कोई उम्मीदवार कमजोर।
यह चुनाव केवल चेहरों का नहीं, बल्कि रणनीति, जनाधार और सही समय पर चली सियासी चालों का होगा।
अभी तो बस रणभूमि सजी है—असली घमासान टिकट वितरण और अंतिम समीकरण सामने आने के बाद शुरू होगा।

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