रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
नाबालिग से गैंगरेप मामले में पुलिस तंत्र पर गिरी गाज
डीसीपी वेस्ट हटाए गए, सब-इंस्पेक्टर निलंबित, लापरवाही पर सख्त संदेश
कानपुर । जनपद में 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी के साथ हुए जघन्य अपहरण एवं गैंगरेप मामले ने न केवल मानवता को झकझोर दिया है, बल्कि पुलिस तंत्र की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के उच्चाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी को पद से हटा दिया है, जबकि सब-इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
घटना का भयावह विवरण
जानकारी के अनुसार, सोमवार देर रात स्कॉर्पियो सवार कुछ लोगों ने 14 साल की किशोरी का अपहरण किया। आरोप है कि करीब दो घंटे तक एक दरोगा और एक पत्रकार ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। किशोरी की हालत बिगड़ने पर आरोपी उसे घर के बाहर फेंककर फरार हो गए।
घटना के बाद जब परिजन पीड़िता को लेकर पुलिस चौकी पहुंचे, तो वहां से उन्हें कथित तौर पर भगा दिया गया। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत के पश्चात एफआईआर दर्ज तो की गई, लेकिन आरोपियों के नाम हटाकर मुकदमा अज्ञात में दर्ज कर दिया गया, जिससे पुलिस की मंशा पर सवाल उठने लगे।
वरिष्ठ अधिकारियों की सख्त कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस आयुक्त आर.के. स्वरूप (खुबीर लाल) ने पूरे प्रकरण की समीक्षा की। जांच में यह सामने आया कि यह मामला डीसीपी वेस्ट के क्षेत्राधिकार का था और प्रारंभिक स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई। इसी के चलते डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से हटाकर डीसीपी मुख्यालय से अटैच कर दिया गया।
वहीं, सब-इंस्पेक्टर विक्रम सिंह पर आरोप है कि उन्होंने मामले में जानबूझकर पॉक्सो एक्ट की धाराएं नहीं लगाईं और तथ्यों में तोड़-मरोड़ कर रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस गंभीर आरोप के आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस आयुक्त का बयान
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि प्रारंभ में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन जैसे-जैसे तथ्य सामने आए, पुलिस की भूमिका की जांच की गई। उन्होंने दो टूक कहा कि नाबालिग से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या संवेदनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
कानून-व्यवस्था और विश्वास का सवाल
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र की जवाबदेही, पारदर्शिता और पीड़ित के प्रति संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। उच्च अधिकारियों की कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि विभाग अपनी छवि बचाने से पहले कानून और न्याय को प्राथमिकता देगा।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और पीड़िता के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पूरा प्रदेश इस बात पर नजर बनाए हुए है कि क्या दोषियों को सख्त सजा मिलेगी और पीड़िता को न्याय मिल पाएगा या नहीं।
