यमुना में अवैध खनन के आरोपों पर एनजीटी सख्त , पुलिस आयुक्त व जिला खनन अधिकारी से मांगी रिपोर्ट और शपथपत्र

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़ 

यमुना में अवैध खनन के आरोपों पर एनजीटी सख्त

पुलिस आयुक्त व जिला खनन अधिकारी से मांगी रिपोर्ट और शपथपत्र

GRAP प्रतिबंधों के उल्लंघन की शिकायतों पर जवाब तलब

गाजियाबाद । लोनी क्षेत्र में यमुना नदी में अवैध खनन को लेकर दायर एक मूल आवेदन पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम आदेश पारित किया है। एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने पुलिस आयुक्त, गाजियाबाद तथा जिला खनन अधिकारी, गाजियाबाद को शिकायतों पर की गई कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट और शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

रात में अवैध खनन के आरोप

एनजीटी के समक्ष आवेदक की ओर से दाखिल रिजॉइंडर में आरोप लगाया गया कि 2 जनवरी 2026 की रात लगभग 9:30 बजे यमुना नदी क्षेत्र में पट्टा क्षेत्र से बाहर भारी मशीनों द्वारा गहराई तक खनन किया गया। यह भी कहा गया कि इस संबंध में जिलाधिकारी, जिला खनन अधिकारी और पुलिस को सूचना दी गई, किंतु तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई।

GRAP प्रतिबंधों के बाद भी गतिविधियों की शिकायत

आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि 16 जनवरी को GRAP-III तथा 17 जनवरी को GRAP-IV लागू होने के बावजूद कथित रूप से खनन गतिविधियां जारी रहीं। इसके समर्थन में 18 जनवरी 2026 को फोटोग्राफ संलग्न किए गए हैं, जिन पर एनजीटी ने प्रतिवादियों से स्पष्ट जवाब मांगा है।

कोर्ट ने प्रशासन से मांगा स्पष्ट विवरण

एनजीटी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि पुलिस आयुक्त, गाजियाबाद को यह बताना होगा कि आवेदक द्वारा दी गई सूचना पर क्या कार्रवाई की गई। यदि निर्धारित तिथि तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की जाती है, तो पुलिस आयुक्त को स्वयं या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकरण के समक्ष उपस्थित होकर कारण बताना होगा।

इसी तरह जिला खनन अधिकारी, गाजियाबाद को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं कि क्या उन्हें अवैध खनन की सूचना दी गई थी, और यदि दी गई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई। साथ ही यह भी बताना होगा कि संबंधित क्षेत्र में रात्रिकालीन खनन या खनिज परिवहन हुआ या नहीं, और उस स्थिति में क्या कदम उठाए गए।

व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश

एनजीटी ने जिला खनन अधिकारी को अगली सुनवाई की तिथि पर संबंधित अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह निर्देश मामले की गंभीरता और न्यायाधिकरण की सतर्कता को दर्शाता है।

जनहित से जुड़ा संवेदनशील मामला

यमुना नदी क्षेत्र में खनन से जुड़े मामलों को पर्यावरण और जनहित से सीधे जुड़ा विषय मानते हुए एनजीटी ने सभी तथ्यों पर विस्तृत और तथ्यात्मक जवाब सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। दो वर्ष पूर्व नदी क्षेत्र में हुए कटाव की पृष्ठभूमि में यह मामला और भी संवेदनशील माना जा रहा है।

29 जनवरी को अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को होगी। तब तक सभी संबंधित अधिकारियों को एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप अपनी रिपोर्ट और शपथपत्र दाखिल करने होंगे।

एनजीटी का यह आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि पर्यावरणीय शिकायतों में लापरवाही अब स्वीकार्य नहीं होगी और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

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