रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
मादुरो प्रकरण पर वैश्विक भूचाल
अमेरिकी कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय कानून पर संकट, संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के भीतर से भी उठे सवाल
वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क/काराकास। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़े घटनाक्रम ने न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र से लेकर अमेरिका के भीतर की राजनीति तक गंभीर असहजता पैदा कर दी है। इस मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या वैश्विक ताक़तें कानून के नाम पर संप्रभुता की सीमाएं लांघ सकती हैं।
अमेरिकी कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र की तीखी टिप्पणी
यूएन का संकेत—दुनिया और असुरक्षित हो सकती है
संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर खुली चिंता जताई गई है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कार्यालय से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को कमजोर कर सकती हैं।
यूएन मानवाधिकार तंत्र ने स्पष्ट किया कि कानून लागू करने के नाम पर सैन्य या बल प्रयोग एक खतरनाक मिसाल बन सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के कई प्रतिनिधियों का मानना है कि यह मामला यूएन चार्टर, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को सीधे चुनौती देता है।
अमेरिका के भीतर भी विरोध के स्वर
कांग्रेस और राजनीतिक गलियारों में असहमति
अमेरिका के भीतर भी यह कार्रवाई निर्विवाद नहीं रही।
अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के कुछ वरिष्ठ सांसदों और नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा कि किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई अमेरिका को नैतिक और कानूनी रूप से कमजोर स्थिति में ला सकती है।
कुछ डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नेताओं ने इसे विदेश नीति में अति-आक्रामकता करार देते हुए चेतावनी दी कि इससे अमेरिका की वैश्विक छवि और कूटनीतिक विश्वसनीयता को नुकसान हो सकता है।
अमेरिकी राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठा कि क्या इस कदम से भविष्य में अन्य देश भी इसी तर्क का इस्तेमाल कर अमेरिकी नेतृत्व के खिलाफ कार्रवाई को जायज़ ठहरा सकते हैं।
रूस-चीन और लैटिन अमेरिका का तीखा प्रतिरोध
संप्रभुता पर हमला, लाल रेखा पार करने का आरोप
रूस और चीन ने अमेरिका पर संप्रभुता के उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून को ताक पर रखने का आरोप लगाया।
कई लैटिन अमेरिकी देशों ने कहा कि यह कार्रवाई पूरे क्षेत्र को अस्थिरता की ओर धकेल सकती है।
इन देशों का तर्क है कि यह मामला न्याय से अधिक शक्ति-प्रदर्शन का प्रतीक बनता जा रहा है।
पश्चिमी देशों की दुविधा
आरोप गंभीर, लेकिन तरीका विवादित
यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों ने
मादुरो पर लगे आरोपों को गंभीर माना,
लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय प्रक्रिया से हटकर की गई कोई भी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं हो सकती।
यह रुख दर्शाता है कि अमेरिका के सहयोगी भी पूरी तरह सहज नहीं हैं।
भू-राजनीतिक टकराव और शक्ति संतुलन
महाशक्तियों की राजनीति और तेज
विशेषज्ञों के अनुसार यह घटनाक्रम
अमेरिका बनाम रूस-चीन की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और धार दे रहा है।
इससे यह संदेश गया है कि दुनिया में नियमों की जगह शक्ति की भूमिका बढ़ती जा रही है, जो आने वाले वर्षों में बड़े टकराव की जमीन तैयार कर सकती है।
तेल, अर्थव्यवस्था और वैश्विक असर
बाजारों में बेचैनी, निवेशकों की नजर
वेनेज़ुएला के विशाल तेल संसाधनों के चलते
वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि राजनीतिक तनाव लंबा खिंचने पर तेल कीमतों और निवेश माहौल पर सीधा असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
एक कार्रवाई, कई मोर्चों पर संकट
मादुरो प्रकरण अब केवल एक देश या एक अदालत का मामला नहीं रह गया है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता,
अमेरिका के भीतर से उठता विरोध,
और वैश्विक ध्रुवीकरण
यह साफ संकेत दे रहे हैं कि दुनिया एक नए और अधिक अस्थिर दौर की ओर बढ़ सकती है।
अब सवाल यह नहीं है कि मादुरो पर आरोप क्या हैं,
सवाल यह है कि क्या वैश्विक व्यवस्था ताक़त से चलेगी या नियमों से।
