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तिलक समारोह की खुशियां गोलियों की गूंज में तब्दील ट्रॉनिका सिटी के सुंगरपुर गांव में हर्ष फायरिंग से मेहमान घायल,अवैध परंपरा पर फिर उठे सवाल
लोनी । खुशियों का माहौल अचानक चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया, जब ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के सुंगरपुर गांव में चल रहे तिलक समारोह के दौरान देर रात हर्ष फायरिंग में एक मेहमान को गोली लग गई। घायल युवक का दिल्ली के निजी अस्पताल में उपचार जारी है। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लगन समारोह में चली गोली, मचा हड़कंप
घटना 17 फरवरी 2026 की देर रात की है। गांव सुंगरपुर में सुलखे के बेटे विनय की लगन सगाई का कार्यक्रम चल रहा था। समारोह में बड़ी संख्या में रिश्तेदार और मेहमान मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दावत के दौरान अचानक गोली चलने की आवाज आई, जिससे वहां भगदड़ मच गई। कुछ ही देर में पता चला कि एक मेहमान को गोली लग गई है।
सोनीपत से आए 40 वर्षीय मेहमान गंभीर रूप से घायल
घायल की पहचान हरियाणा के सोनीपत निवासी 40 वर्षीय कैलाश के रूप में हुई है। गोली उनके पेट में लगी। पहले उन्हें लोनी के 50 शैया अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल रेफर किया गया। बाद में परिजन उन्हें दिल्ली के पीरागढ़ी स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सक उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
पुलिस की कार्रवाई: अज्ञात के खिलाफ मुकदमा, जांच तेज
मामले में ट्रॉनिका सिटी थाना में तैनात उपनिरीक्षक राहुल तोमर की शिकायत पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि घटना की गहन जांच की जा रही है। समारोह में मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है और जल्द ही आरोपी की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।
हर्ष फायरिंग: परंपरा या जानलेवा लापरवाही?
यह घटना एक बार फिर शादी-ब्याह और सामाजिक आयोजनों में होने वाली हर्ष फायरिंग की खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर करती है। खुशियों के नाम पर की जाने वाली यह अवैध गतिविधि कई बार जानलेवा साबित हो चुकी है। कानूनन सार्वजनिक स्थानों पर फायरिंग अपराध है, इसके बावजूद ऐसे मामलों में लापरवाही और दिखावे की मानसिकता हावी रहती है।
प्रशासन के सामने चुनौती: रोकथाम कैसे हो?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल घटना के बाद मुकदमा दर्ज करना पर्याप्त नहीं है।
आयोजकों की जिम्मेदारी तय हो
लाइसेंसी हथियारों की निगरानी सख्त हो
समारोह से पहले स्थानीय पुलिस को सूचना और निगरानी अनिवार्य हो
दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई हो
यदि इन बिंदुओं पर गंभीरता से अमल नहीं हुआ तो ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शादी-समारोहों में अवैध और खतरनाक गतिविधियों से बचें। समाज के जागरूक वर्ग का भी दायित्व है कि वे हर्ष फायरिंग जैसी कुप्रथा का खुलकर विरोध करें। खुशियां मनाने के तरीके ऐसे हों जो किसी की जिंदगी पर भारी न पड़ें।
निष्कर्ष:
सुंगरपुर की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि चेतावनी है। जब तक कानून का सख्त पालन और सामाजिक जागरूकता साथ-साथ नहीं चलेगी, तब तक ‘हर्ष फायरिंग’ जैसी परंपराएं खुशी के अवसरों को मातम में बदलती रहेंगी।
