रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
अंधविश्वास बना हत्या का औजार
तांत्रिक के झांसे में आकर दोस्त ने दोस्त को उतारा मौत के घाट
लोनी। ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र में सामने आई ऑटो चालक नवीन कुमार की नृशंस हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज में गहराते अंधविश्वास, तांत्रिक पाखंड और नैतिक पतन की भयावह तस्वीर है। यह मामला बताता है कि जब लालच, डर और अंधश्रद्धा एक साथ मिलते हैं, तो इंसान इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है।
जंगल में जला शव, सभ्यता पर काला धब्बा
अगरौला गांव के जंगल में जले ऑटो के भीतर मिला नर कंकाल शुरुआत में भले ही एक रहस्यमय घटना प्रतीत हुआ हो, लेकिन जांच में सामने आया सच समाज को झकझोर देने वाला है। अंकुर विहार निवासी नवीन कुमार की हत्या उसके ही दोस्तों ने की—इसलिए नहीं कि कोई गहरी दुश्मनी थी, बल्कि इसलिए कि एक तांत्रिक ने मालामाल होने का सपना दिखाया।
यह सवाल अत्यंत गंभीर है कि इक्कीसवीं सदी में भी लोग तांत्रिकों के कथित कहने पर हत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देने को तैयार हो जाते हैं।
लालच, पाखंड और हिंसा का घातक गठजोड़
पुलिस जांच में सामने आया कि तांत्रिक ने आरोपियों को विश्वास दिलाया था कि किसी विशेष कृत्य से धन की प्राप्ति होगी। इसी अंधविश्वास ने उन्हें इस हद तक अंधा कर दिया कि उन्होंने नवीन के सिर पर गैस सिलेंडर से वार कर उसकी हत्या कर दी और पहचान मिटाने के लिए शव को ऑटो सहित जला दिया।
यह केवल हत्या नहीं, बल्कि मानव विवेक की हत्या भी है।
तांत्रिकों पर सवाल, समाज की चुप्पी भी दोषी
इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि
ऐसे तांत्रिक खुलेआम समाज में कैसे सक्रिय हैं
इनकी गतिविधियों पर नजर क्यों नहीं रखी जाती
और सबसे बड़ा सवाल—लोग इनके जाल में क्यों फंसते हैं
जब तक अंधविश्वास के खिलाफ सामाजिक चेतना नहीं बनेगी, तब तक ऐसे पाखंडी नए-नए शिकार तैयार करते रहेंगे।
पुलिस की कार्रवाई, पर रोकथाम कहां
पुलिस ने मामले का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, एक फरार है और उसकी तलाश जारी है। घटना में प्रयुक्त ऑटो और गैस सिलेंडर की बरामदगी भी की गई है।
लेकिन यह कार्रवाई घटना के बाद की गई।
सवाल यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन ऐसे पाखंडी तत्वों की पहचान कर समय रहते उन पर कार्रवाई नहीं कर सकता, ताकि हत्या होने से पहले ही अपराध की जड़ काटी जा सके।
अंधविश्वास केवल निजी मामला नहीं
यह मान लेना कि अंधविश्वास व्यक्ति की निजी सोच है, सबसे बड़ी भूल है। जब यही सोच हत्या, बलि और हिंसा में बदल जाए, तो यह कानून-व्यवस्था और समाज दोनों के लिए खतरा बन जाती है।
नवीन कुमार की हत्या इस बात का प्रमाण है कि अंधविश्वास केवल आस्था नहीं, बल्कि कई बार खूनी अपराध का रास्ता बन जाता है।
निष्कर्ष : चेतना या चेतावनी
यह घटना पूरे लोनी, अंकुर विहार और ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र के लिए चेतावनी है।
यदि समाज ने अंधविश्वास के खिलाफ आवाज नहीं उठाई,
यदि प्रशासन ने तांत्रिक गतिविधियों पर सख्ती नहीं की,
तो अगला शिकार कोई और होगा।
यह हत्या केवल नवीन कुमार की नहीं है—
यह समाज की सोच की हत्या है।
