
जन वाणी न्यूज़
गाजियाबाद के नाहल गांव में फिर सुरक्षा एजेंसियों की हलचल
खुफिया इनपुट पर पुलिस-एजेंसियों की दबिश, छह संदिग्धों से पूछताछ; डिजिटल नेटवर्क और पुराने आपराधिक कनेक्शन भी जांच के दायरे में
पुलिस जांच में जैश-ए-मोहम्मद और फरातुल्ला गौरी जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से प्रभावित थे
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले के मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। खुफिया इनपुट के आधार पर स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए छह संदिग्ध व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए गए हैं और ई-मेल, व्हाट्सएप तथा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद संपर्कों की गहन पड़ताल की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े इनपुट मिलने के बाद की गई। हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और जांच जारी रहने की बात कही जा रही है।
खुफिया इनपुट के बाद कार्रवाई, पांच लोगों से पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक नाहल गांव में देर रात पुलिस और खुफिया इकाइयों की टीम ने दबिश दी। इस दौरान पांच व्यक्तियों को पूछताछ के लिए उठाया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में एक युवक कानून (एलएलबी) का छात्र भी बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लोगों के मोबाइल फोन और डिजिटल संपर्कों का संबंध किन व्यक्तियों या संगठनों से है। फिलहाल पुलिस किसी भी तरह की पुष्टि से बच रही है और कह रही है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
डिजिटल जांच बनी मुख्य कड़ी
इस कार्रवाई में जांच एजेंसियां खास तौर पर डिजिटल साक्ष्यों पर ध्यान दे रही हैं। पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
जांच के प्रमुख बिंदु इस प्रकार बताए जा रहे हैं—
मोबाइल कॉल डिटेल और चैट रिकॉर्ड
ई-मेल और ऑनलाइन कम्युनिकेशन
व्हाट्सएप, टेलीग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
संदिग्ध संपर्क और संभावित नेटवर्क
पुलिस सूत्रों का कहना है कि डिजिटल जांच से कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
नाहल गांव पहले भी रहा है पुलिस के रडार पर
नाहल गांव का नाम पहले भी कई बार पुलिस रिकॉर्ड में सामने आता रहा है। वर्ष 2025 में यहां उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया था जब पुलिस की दबिश के दौरान भीड़ और पुलिस के बीच टकराव हो गया था।
उस घटना में एक पुलिसकर्मी की गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस का कहना था कि टीम एक वांछित अपराधी को पकड़ने गई थी, लेकिन कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा हमला कर दिया गया।
घटना के बाद बड़े पैमाने पर पुलिस अभियान चलाया गया था और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से यह इलाका सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में बना हुआ है।
संगठित अपराध और आपराधिक नेटवर्क का भी एंगल
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या हिरासत में लिए गए लोगों का संबंध किसी संगठित आपराधिक नेटवर्क से तो नहीं है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस क्षेत्र में पहले वाहन चोरी गिरोह, अवैध हथियार और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में कई बार कार्रवाई हो चुकी है। इसी कारण किसी भी संदिग्ध सूचना को गंभीरता से लिया जा रहा है।
संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस सतर्क
नाहल गांव दिल्ली-एनसीआर के संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। यहां पहले भी पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव जैसी घटनाएं हो चुकी हैं।
इसी वजह से इस बार की कार्रवाई में पुलिस बेहद सावधानी बरत रही है। इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है और खुफिया तंत्र को भी सक्रिय रखा गया है।
पुलिस का रुख: जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी तस्वीर
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल पूछताछ और डिजिटल जांच जारी है। अभी किसी को आरोपी घोषित नहीं किया गया है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पुलिस का कहना है कि यदि जांच में किसी आपराधिक गतिविधि या नेटवर्क के संकेत मिलते हैं तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नाहल गांव में हुई यह कार्रवाई केवल एक सामान्य पुलिस दबिश नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे खुफिया इनपुट और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े व्यापक जांच अभियान के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच और पूछताछ के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
पुलिस जांच में आया सामने जैश-ए-मोहम्मद और फरातुल्ला गौरी जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से थे प्रभावित
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पकड़े गए आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से प्रभावित थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे जैश-ए-मोहम्मद और फरातुल्ला गौरी जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के सोशल मीडिया अकाउंट फॉलो करते थे और उनकी ट्रेनिंग से जुड़े वीडियो देखते थे। पुलिस के अनुसार व्हाट्सएप चैट और डिजिटल साक्ष्यों से इनके कट्टरपंथी विचारों और संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं, जिनकी साइबर और अन्य जांच एजेंसियां गहन पड़ताल कर रही है।
