मीरपुर में सॉलिड वेस्ट प्लांट पर सियासत तेज: खतौली विधायक मदन भैया ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, पुनर्विचार की मांग

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जन वाणी न्यूज़ 

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता 

मीरपुर में सॉलिड वेस्ट प्लांट पर सियासत तेज: खतौली विधायक मदन भैया ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, पुनर्विचार की मांग

— जनता के विरोध के बीच उठी आवाज, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर जताई गहरी चिंता

गाजियाबाद/लोनी। मीरपुर हिंदू गांव में प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। खतौली से राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) विधायक मदन भैया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्लांट निर्माण पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

विधायक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि घनी आबादी के समीप कचरा निस्तारण संयंत्र स्थापित करना स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवन स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए वैकल्पिक स्थान तलाशने का आग्रह किया है।

जनता का विरोध बना बड़ा मुद्दा

मीरपुर हिंदू और आसपास के गांवों में प्लांट स्थापना के खिलाफ लंबे समय से असंतोष पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कचरे से उठने वाली दुर्गंध, संभावित प्रदूषण और बीमारियों का खतरा उनके जीवन को प्रभावित करेगा।

स्थानीय लोगों के बढ़ते विरोध को देखते हुए विधायक मदन भैया ने इसे केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। उनका कहना है कि विकास योजनाएं जरूरी हैं, लेकिन उन्हें ऐसे स्थान पर लागू किया जाना चाहिए जहां आमजन का जीवन संकट में न पड़े।

क्षेत्र से गहरा जुड़ाव, इसलिए उठाई आवाज

रालोद विधायक मदन भैया मूल रूप से लोनी क्षेत्र के जावली गांव के निवासी हैं और लंबे समय से इस इलाके की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े रहे हैं। वे खेकड़ा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं— उस दौर में लोनी भी इसी विधानसभा का हिस्सा था। आज भी उनका स्थायी निवास जावली गांव में ही है, जिससे इस मुद्दे पर उनकी सक्रियता को स्थानीय सरोकारों से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या है विधायक की मुख्य मांग?

घनी आबादी से दूर प्लांट स्थापित किया जाए।

पर्यावरणीय प्रभाव का निष्पक्ष आकलन कराया जाए।

ग्रामीणों की आपत्तियों को सुनकर समाधान निकाला जाए।

जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निर्णय भविष्य में बड़े संकट को जन्म दे सकता है।

प्रशासन बनाम जनभावना – टकराव के संकेत

यदि सरकार इस परियोजना को मौजूदा स्थान पर आगे बढ़ाती है, तो विरोध और तेज होने की आशंका है। जानकारों का मानना है कि कचरा प्रबंधन जैसी परियोजनाएं आवश्यक जरूर हैं, लेकिन स्थान चयन में पारदर्शिता और सहमति बेहद महत्वपूर्ण होती है।

राजनीतिक हलकों में भी इस पत्र को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा जनआंदोलन या राजनीतिक बहस का रूप ले सकता है।

आगे क्या?

अब निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि सरकार पुनर्विचार करती है, तो यह ग्रामीणों के लिए राहत का संकेत होगा; अन्यथा मीरपुर का यह विवाद प्रशासन और जनता के बीच टकराव को और गहरा कर सकता है।

फिलहाल इतना तय है— मीरपुर का सॉलिड वेस्ट प्लांट अब सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और राजनीतिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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