अंबरनाथ नगर परिषद में सियासी उलटफेर बीजेपी–कांग्रेस का अप्रत्याशित गठजोड़, शिंदे गुट की शिवसेना सत्ता से बाहर

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

अंबरनाथ नगर परिषद में सियासी उलटफेर

बीजेपी–कांग्रेस का अप्रत्याशित गठजोड़, शिंदे गुट की शिवसेना सत्ता से बाहर

मुंबई । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर यह कहावत चरितार्थ होती दिखी कि सियासत में न स्थायी दोस्त होते हैं, न स्थायी दुश्मन। एक-दूसरे की धुर विरोधी मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने महाराष्ट्र की अंबरनाथ नगर परिषद में ऐसा गठजोड़ कर लिया, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस गठबंधन का सीधा नुकसान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को उठाना पड़ा, जो सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता से बाहर हो गई।

संख्या बल में सबसे आगे थी शिवसेना, फिर भी हाथ से गई सत्ता

अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने 28 पार्षद पदों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ा दल बनने का गौरव हासिल किया था। नगर परिषद में मेयर चुनाव के लिए 30 पार्षदों का बहुमत जरूरी था। शिवसेना बहुमत से महज दो कदम दूर थी, लेकिन विरोधी दलों की रणनीति ने समीकरण बदल दिए।

 

बीजेपी–कांग्रेस–एनसीपी का साझा मोर्चा

शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के उद्देश्य से बीजेपी, कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी ने आपसी मतभेद भुलाकर गठबंधन कर लिया।

बीजेपी : 16 पार्षद

कांग्रेस : 12 पार्षद

एनसीपी (अजित पवार गुट) : 4 पार्षद

इस तरह गठबंधन के पास कुल 32 पार्षद हो गए और बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार हो गया। नतीजतन, बीजेपी की तेजश्री करंजुले अंबरनाथ नगर परिषद की नई मेयर चुनी गईं।

 

शिवसेना का तीखा हमला, गठबंधन को बताया ‘अपवित्र’

बीजेपी और कांग्रेस के एक साथ आने पर शिंदे गुट की शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
शिवसेना विधायक बालाजी किनिकर ने इस गठबंधन को “अपवित्र” करार देते हुए बीजेपी पर विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि

> “जो पार्टी कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देती रही, वही आज कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में बैठी है। यह शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।”

 

किनिकर ने इसे अवसरवादी राजनीति बताते हुए कहा कि जनता के जनादेश का अपमान किया गया है।

बीजेपी का पलटवार: शिवसेना के कार्यकाल में हुआ भ्रष्टाचार

शिवसेना के आरोपों पर बीजेपी ने भी कड़ा जवाब दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अंबरनाथ नगर परिषद पर शिवसेना के कब्जे के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ।
बीजेपी का दावा है कि

> “यदि हम एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन करते, तो वही वास्तव में अपवित्र होता। भ्रष्टाचार से मुक्त प्रशासन देने के लिए यह गठबंधन जरूरी था।”

 

महाराष्ट्र की राजनीति में नए संकेत

अंबरनाथ नगर परिषद का यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि स्थानीय निकायों की राजनीति में वैचारिक विरोध अक्सर संख्या बल के आगे गौण हो जाता है। बीजेपी और कांग्रेस का यह गठजोड़ भले ही अस्थायी हो, लेकिन इसके दूरगामी राजनीतिक संदेश हैं, जिनकी गूंज आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में सुनाई दे सकती है।

फिलहाल, अंबरनाथ में सत्ता समीकरण बदल चुके हैं और सबसे बड़ा झटका शिंदे गुट की शिवसेना को लगा है।

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