जन वाणी न्यूज़
खामेनेई की मौत की खबर पर देशभर में उबाल: सड़कों पर उतरा शिया समुदाय, कई शहरों में प्रदर्शन और मातम
लखनऊ से लेकर प्रयागराज, बिजनौर और अमरोहा तक जुलूस; 3 दिन का शोक घोषित, काले झंडे और बंद रहेंगे इमामबाड़े
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
लखनऊ, 2 मार्च। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही देश के विभिन्न हिस्सों में शिया समुदाय के बीच गहरा शोक और आक्रोश देखने को मिला। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार रात हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। छोटा इमामबाड़ा से लेकर बड़ा इमामबाड़ा तक कैंडल मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में खामेनेई के पोस्टर थे और अमेरिका-इजराइल के खिलाफ तीखे नारे लगाए गए।
कई शहरों में जुलूस और पुतला दहन
बिजनौर और अमरोहा में भी शिया समुदाय ने जुलूस निकाला। कई स्थानों पर अमेरिका का पुतला दहन किया गया। माहौल पूरी तरह शोक और गुस्से से भरा दिखाई दिया। युवाओं और बच्चों ने मोहर्रम की तर्ज पर जंजीरों से मातम किया, जबकि प्रयागराज में महिलाओं ने कैंडल मार्च निकालकर शांति और श्रद्धांजलि का संदेश दिया।
3 दिन का शोक, काले झंडे और बंद इमामबाड़े
खबर मिलते ही ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन दिन के शोक की घोषणा की। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि समुदाय अपने घरों पर काले झंडे लगाएगा और काले वस्त्र धारण करेगा। साथ ही छोटा और बड़ा इमामबाड़ा 3 मार्च तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
लोगों का कहना है कि “हमारे रहबर की शहादत खाली नहीं जाएगी।” समुदाय के भीतर इस घटना को लेकर गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने
प्रदर्शनों के बीच राजेश्वर सिंह ने इन प्रदर्शनों की निंदा करते हुए कहा कि किसी विदेशी मुद्दे को लेकर देश का माहौल बिगाड़ना उचित नहीं है। उन्होंने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
देश के अलग-अलग शहरों में हुए इन प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का प्रभाव अब सीधे स्थानीय सड़कों तक दिखाई देने लगा है। जहां एक ओर समुदाय अपने धार्मिक और भावनात्मक जुड़ाव के चलते शोक मना रहा है, वहीं प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
