रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
गाजियाबाद में मतदाता सूची से करीब 30 प्रतिशत नाम बाहर, SIR प्रक्रिया के बाद बड़ा खुलासा
8.39 लाख मतदाता सत्यापन न होने पर हटाए गए, राजनीतिक दलों के साथ डीएम ने की समीक्षा बैठक
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद में चुनाव आयोग द्वारा कराई गई विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया 26 दिसंबर को पूरी हो गई। शुक्रवार इस प्रक्रिया का अंतिम दिन रहा। SIR के समापन के बाद जिले की मतदाता सूची में अभूतपूर्व और चौंकाने वाला बदलाव सामने आया है, जिसे लेकर आम मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच चिंता बढ़ गई है।
SIR से पहले गाजियाबाद जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर कुल 28 लाख 37 हजार 991 मतदाता पंजीकृत थे। गहन जांच, घर-घर सत्यापन और अभिलेखीय मिलान के बाद 8 लाख 39 हजार 142 मतदाताओं के नाम सत्यापन न होने के कारण मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए। यह संख्या कुल मतदाताओं का करीब 29.57 प्रतिशत है, जिसे चुनावी दृष्टि से बेहद बड़ा और गंभीर आंकड़ा माना जा रहा है।
विधानसभा वार हटाए गए मतदाताओं का आंकड़ा
SIR प्रक्रिया के बाद विधानसभा-वार सामने आए आंकड़े इस प्रकार हैं—
विधानसभा लोनी (53)
➤ 26.18 प्रतिशत मतदाताओं के नाम काटे गए
विधानसभा मुरादनगर (54)
➤ 23.66 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए
विधानसभा साहिबाबाद (55)
➤ 38.31 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से बाहर
विधानसभा गाजियाबाद (56)
➤ 25.35 प्रतिशत मतदाता हटाए गए
विधानसभा मोदीनगर (57)
➤ 15.47 प्रतिशत मतदाताओं के नाम काटे गए
कुल मिलाकर गाजियाबाद जनपद में लगभग 29.57 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हुए, जो पूरे जिले के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
डीएम ने राजनीतिक दलों को दी पूरी जानकारी
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जिलाधिकारी एवं सह जिला निर्वाचन अधिकारी रवींद्र कुमार मांदड ने जिले के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में SIR प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की गई और यह भी बताया गया कि किस आधार पर नाम हटाए गए हैं।
डीएम ने स्पष्ट किया कि—
सत्यापन के दौरान मृत मतदाता,
स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता,
दोहरी प्रविष्टियां,
और पते पर न मिलने वाले मतदाता
को नियमानुसार सूची से हटाया गया है।
आगे क्या है प्रक्रिया
प्रशासन के अनुसार,
जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं,
वे निर्धारित समयसीमा में दावा-आपत्ति (Claim & Objection) के माध्यम से
आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर
अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं।
इसके लिए चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की प्रक्रिया पहले की तरह लागू रहेगी।
लोकतंत्र के लिए अहम मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर संकेत है। यदि समय रहते प्रभावित मतदाताओं को जागरूक नहीं किया गया, तो आगामी चुनावों में लाखों लोग मतदान के अधिकार से वंचित रह सकते हैं।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे—
अपनी मतदाता सूची में नाम की स्थिति अवश्य जांचें,
किसी भी त्रुटि की स्थिति में तुरंत निर्वाचन कार्यालय या बीएलओ से संपर्क करें,
और समय रहते आवश्यक सुधार कराएं।
