जन वाणी न्यूज़
गाजियाबाद में राष्ट्रीय पक्षी की रहस्यमय मौतों से हड़कंप
ट्रॉनिका सिटी के पचायरा गांव में दो दिनों में 13 मोरों के शव मिलने से सनसनी, ग्रामीणों ने जताई जहर देने की आशंका
गाजियाबाद, 24 फरवरी 2026
रिपोर्ट मोनू सिंह
थाना ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र के ग्राम पचायरा में भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर की लगातार हो रही मौतों ने पूरे इलाके को दहला दिया है। 23 फरवरी को जहां लगभग 11 मोरों के शव मिलने से सनसनी फैल गई थी, वहीं 24 फरवरी को फिर दो मोरों के मृत मिलने से मामला और भी गंभीर हो गया है। दो दिनों में कुल 13 मोरों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
ग्रामीणों के अनुसार, 23 फरवरी की सुबह खेतों के आसपास कई मोर मृत अवस्था में पड़े मिले। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मृत मोरों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। उसी दिन एक मोर को गंभीर अवस्था में पाया गया, जिसकी जान ग्रामीणों और वन विभाग के संयुक्त प्रयास से बचा ली गई।
हालांकि, मौत के कारणों का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हो सका है। प्रारंभिक तौर पर किसी बीमारी, जहरीले दाने या रासायनिक पदार्थ की आशंका से इंकार नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप: “जहर देकर मारे गए मोर”
गांव के कुछ लोगों का कहना है कि मोरों की मौत प्राकृतिक नहीं है। उनका आरोप है कि किसी ने जानबूझकर खेतों में जहरीला पदार्थ डाला, जिससे यह घटना हुई। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में राष्ट्रीय पक्षी का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।
वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई
मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। आसपास के खेतों से नमूने एकत्र किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
वन विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जहर देने की पुष्टि होती है तो दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी पहलू: राष्ट्रीय पक्षी की हत्या गंभीर अपराध
भारत में मोर को राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा प्राप्त है और यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है। ऐसे में मोर को नुकसान पहुंचाना या उसकी हत्या करना दंडनीय अपराध है, जिसमें कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण
विशेषज्ञों के अनुसार, मोर पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे कीट-पतंगों को नियंत्रित करते हैं और जैव विविधता के संरक्षण में सहायक होते हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल वन्यजीवों के लिए बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी गंभीर खतरे का संकेत हैं।
प्रशासन के लिए चुनौती
लगातार दो दिनों में राष्ट्रीय पक्षी के शव मिलना प्रशासनिक सतर्कता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है। क्या यह लापरवाही है? क्या किसी साजिश का हिस्सा? या फिर कृषि रसायनों का दुष्प्रभाव? इन सभी बिंदुओं पर गहन जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों की मांग
निष्पक्ष और पारदर्शी जांच
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी
क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा के स्थायी इंतजाम
ग्राम पचायरा में मोरों की रहस्यमय मौत केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावना से जुड़ा संवेदनशील विषय है। जब राष्ट्रीय पक्षी ही सुरक्षित नहीं, तो वन्यजीव संरक्षण के दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके परिणामों पर टिकी हैं।
यदि दोषी सामने आते हैं, तो क्या उन्हें कानून के अनुसार कठोर दंड मिलेगा? यह आने वाला समय बताएगा।
