23 साल पुराने पत्रकार हत्याकांड में बड़ा मोड़: हाईकोर्ट से राम रहीम बरी

0
20
Oplus_131072

जन वाणी न्यूज़

23 साल पुराने पत्रकार हत्याकांड में बड़ा मोड़: हाईकोर्ट से राम रहीम बरी

सबूतों के अभाव में डेरा प्रमुख को राहत, तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार

रविन्द्र बंसल, वरिष्ठ संवाददाता

चंडीगढ़। करीब 23 वर्ष पुराने चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं हो सका कि वह इस हत्या की साजिश में शामिल थे।

हालांकि अदालत ने मामले में दोषी पाए गए कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने माना कि इन तीनों के खिलाफ उपलब्ध गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित होती है।

सीबीआई कोर्ट ने दी थी सजा

इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की विशेष अदालत ने इस मामले में राम रहीम सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इस फैसले को सभी आरोपियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लंबी कानूनी सुनवाई के बाद अब हाईकोर्ट ने अपना अंतिम निर्णय सुनाया।

कोर्ट ने क्यों दी राहत

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से राम रहीम की साजिश में सीधी भूमिका साबित नहीं होती। तकनीकी और फोरेंसिक पहलुओं पर उठे सवालों ने भी संदेह की स्थिति पैदा की। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

वहीं अदालत ने माना कि अन्य तीन दोषियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य मजबूत हैं, इसलिए उनकी उम्रकैद की सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया।

2002 में हुई थी सनसनीखेज वारदात

यह मामला वर्ष 2002 का है। सिरसा से प्रकाशित अखबार ‘इवनिंग टाइम्स’ के संपादक रामचंद्र छत्रपति ने डेरा से जुड़े साध्वियों के यौन शोषण से संबंधित एक गुमनाम पत्र अपने अखबार में प्रकाशित किया था।

19 अक्टूबर 2002 की रात उनके घर के बाहर उन पर गोलियां चलाई गईं। गंभीर रूप से घायल छत्रपति की 21 अक्टूबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना ने उस समय देशभर में सनसनी फैला दी थी और बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फैसला

करीब ढाई दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया और लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्धि केवल ठोस और निर्विवाद साक्ष्यों के आधार पर ही संभव है। पर्याप्त सबूतों के अभाव में अदालत ने राम रहीम को बरी कर दिया, जबकि अन्य दोषियों की सजा बरकरार रखी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here