आम बजट के बाद कर व्यवस्था में बड़ा फेरबदल, उपभोक्ता से उद्योग तक पड़ेगा सीधा असर

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

आम बजट के बाद कर व्यवस्था में बड़ा फेरबदल, उपभोक्ता से उद्योग तक पड़ेगा सीधा असर

जीएसटी सरलीकरण, आयात शुल्क में कटौती और टीसीएस दरों में बदलाव से बाजार में हलचल, आम आदमी की जेब पर मिला-जुला प्रभाव

नई दिल्ली । केंद्र सरकार द्वारा आम बजट के बाद कर व्यवस्था में किए गए व्यापक बदलावों ने बाजार, उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच नई बहस छेड़ दी है। जीएसटी को अधिक सरल और व्यवहारिक बनाने के दावे के साथ कई अहम वस्तुओं पर कर ढांचे में संशोधन किया गया है। इन बदलावों का असर रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर उच्च तकनीक उद्योगों तक साफ दिखाई देगा।

आयात शुल्क में कटौती, सस्ते होंगे कई उत्पाद

बजट के बाद आयात शुल्क में कमी से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) से जुड़े पुर्जे, लिथियम बैटरी, मोबाइल फोन, टीवी और अन्य तकनीकी सामान के दाम घटने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का तर्क है कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लेकिन घरेलू लघु उद्योगों पर दबाव भी बढ़ सकता है।

ईवी और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा

इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी निर्माण में प्रयुक्त कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला सरकार की हरित ऊर्जा नीति से जुड़ा माना जा रहा है। इससे ईवी की लागत कम होने और आम उपभोक्ता तक इसकी पहुंच आसान होने की उम्मीद है। हालांकि, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी निर्भरता को लेकर सवाल अब भी बने हुए हैं।

टीसीएस दरों में बदलाव, मध्यम वर्ग पर असर

विदेश यात्रा, महंगे सामान और कुछ आयातित सेवाओं पर टीसीएस की दरों में संशोधन किया गया है। कई मामलों में टीसीएस घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे नकदी प्रवाह में राहत मिलेगी। वहीं, कर विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत सीमित है और अंतिम कर बोझ आयकर रिटर्न के समय ही स्पष्ट होगा।

सोना-चांदी और कीमती धातुएं

सोने-चांदी पर आयात शुल्क में आंशिक कटौती से सर्राफा बाजार में हलचल है। ज्वेलरी कारोबारियों का मानना है कि इससे मांग बढ़ेगी, जबकि अर्थशास्त्री इसे चालू खाते के घाटे से जोड़कर देख रहे हैं। सरकार का दावा है कि शुल्क संतुलन से तस्करी पर भी अंकुश लगेगा।

जीएसटी सरलीकरण का दावा

22 राज्यों में जीएसटी दरों और प्रक्रियाओं को और सरल करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। रिटर्न प्रक्रिया, टैक्स क्रेडिट और अनुपालन नियमों में सुधार से व्यापारियों को राहत मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, छोटे व्यापारियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अभी भी जटिलताएं बनी हुई हैं।

विश्लेषण : लाभ किसे, बोझ किस पर?

सरकार इन बदलावों को आर्थिक गति बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने का माध्यम बता रही है, जबकि आलोचकों का कहना है कि कर ढांचे में राहत का लाभ बड़े उद्योगों को अधिक और आम उपभोक्ता को सीमित मिलेगा। महंगाई, रोजगार और घरेलू उत्पादन पर इन फैसलों का वास्तविक असर आने वाले महीनों में सामने आएगा।

निष्कर्षतः, बजट के बाद कर प्रणाली में किए गए संशोधन सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा हैं, लेकिन इनका लाभ तभी संतुलित माना जाएगा जब आम आदमी की जेब पर इसका सकारात्मक असर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे।

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