लोनी में ‘सिटी फॉरेस्ट’ योजना फाइलों में कैद, वन भूमि पर अवैध कब्जे और प्रदूषण ने बढ़ाया संकट

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जन वाणी न्यूज़

लोनी में ‘सिटी फॉरेस्ट’ योजना फाइलों में कैद, वन भूमि पर अवैध कब्जे और प्रदूषण ने बढ़ाया संकट

वरिष्ठ संवाददाता जन वाणी न्यूज़

गाजियाबाद/लोनी। जनपद गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र स्थित अहमदनगर नवादा की करीब 43.69 हेक्टेयर वन विभाग की भूमि पर बढ़ते अवैध अतिक्रमण, गंदे पानी के बहाव और गंभीर प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। जिलाधिकारी को भेजे गए प्रार्थना पत्र में पूरे मामले को जनहित और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

शिकायत के मुताबिक यह भूमि सोशल फॉरेस्ट्री (वन विभाग) के अधीन है, जहां पहले से प्राकृतिक रूप से बबूल और कीकर जैसे पेड़ों का घना क्षेत्र मौजूद है। वर्ष 2020 में इस इलाके को ‘सिटी फॉरेस्ट/पर्यटन स्थल’ के रूप में विकसित करने की योजना को मंजूरी भी मिल चुकी थी, लेकिन छह साल बाद भी योजना जमीन पर नहीं उतर सकी।

गंदे नालों का पानी बना सबसे बड़ा खतरा

आरोप है कि नगर पालिका परिषद लोनी द्वारा नालों का गंदा और दूषित पानी इस वन क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है, जिससे हरे-भरे पेड़ सूख रहे हैं और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही न केवल वन संपदा को खत्म कर रही है, बल्कि क्षेत्र की हवा को भी जहरीला बना रही है।

दिल्ली का कचरा और गहराता प्रदूषण संकट

प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वन भूमि पर एक गहरा गड्ढा बनाकर उसमें दिल्ली से लाया जा रहा कचरा डाला जा रहा है। इससे इलाके में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। वर्ष 2025 में लोनी का PM 2.5 स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक (5 µg/m³) से कई गुना अधिक है। यही वजह है कि लोनी को ‘नॉन-अटेनमेंट सिटी’ घोषित किया जा चुका है।

अवैध कब्जों पर प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

स्थानीय लोगों ने वन भूमि पर लगातार हो रहे अवैध कब्जों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्पष्ट सीमांकन (डिमार्केशन) और सुरक्षा के अभाव में भू-माफिया सक्रिय हैं और सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। इसमें संबंधित विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।

छह साल बाद भी अधर में ‘सिटी फॉरेस्ट’ परियोजना

जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2020 में स्वीकृत सिटी फॉरेस्ट योजना आज तक लागू नहीं हो सकी, जबकि क्षेत्र की खराब वायु गुणवत्ता को देखते हुए यह परियोजना जनस्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

प्रशासन से की गई ये प्रमुख मांगें
प्रार्थना पत्र में जिलाधिकारी से मांग की गई है कि—

वन भूमि का तत्काल सीमांकन कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए

सभी अवैध कब्जों को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए

गंदे पानी के बहाव को रोका जाए और वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए

सूख रहे पेड़ों के संरक्षण और नए पौधारोपण की ठोस योजना लागू की जाए

सिटी फॉरेस्ट/पर्यटन परियोजना को शीघ्र प्रभाव से लागू किया जाए

संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए

जनस्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडराता खतरा

स्थानीय नागरिकों और लोनी बार एसोसिएशन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह वन क्षेत्र पूरी तरह खत्म हो सकता है और प्रदूषण का स्तर और भयावह रूप ले सकता है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता दिखाता है या फिर ‘सिटी फॉरेस्ट’ का सपना यूं ही कागजों में दम तोड़ता रहेगा।

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