रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
कपसाड़ कांड : दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण से उबाल, गांव छावनी में तब्दील, कानून-व्यवस्था बड़ी चुनौती
मेरठ । सरधना विधानसभा क्षेत्र के कपसाड़ गांव में दलित महिला की निर्मम हत्या और उसकी बेटी के अपहरण की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, वहीं हालात को काबू में रखने के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। गांव और उसके आसपास का इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
बता दे कि बीते दिनों खेतों की ओर जा रही दलित महिला सुनीता जाटव (लगभग 50 वर्ष) और उनकी 20 वर्षीय बेटी के साथ यह वारदात हुई। आरोप है कि गांव के ही युवक ने बेटी के साथ अभद्रता की कोशिश की, जिसका विरोध करने पर आरोपी ने महिला पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी और उसके साथियों द्वारा बेटी को जबरन अपहृत कर लिया गया।
बेटी अब तक बरामद नहीं, पुलिस पर दबाव
घटना के कई दिन बाद भी पीड़िता की बेटी की सकुशल बरामदगी न हो पाने से आक्रोश और चिंता दोनों गहराते जा रहे हैं। परिजनों ने शुरुआत में शव का अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया था और साफ शब्दों में कहा था कि जब तक बेटी सुरक्षित वापस नहीं लाई जाती और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं होगा। प्रशासनिक आश्वासन और भारी दबाव के बीच बाद में अंतिम संस्कार कराया गया।
400 से अधिक पुलिसकर्मी, कई जिलों में दबिश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव में 400 से अधिक पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। पीएसी, स्थानीय पुलिस और सादी वर्दी में जवान लगातार गश्त कर रहे हैं। गांव के प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर बाहरी लोगों की आवाजाही नियंत्रित की गई है।
पुलिस की 10 से अधिक टीमें मेरठ के साथ-साथ आसपास के जिलों और अन्य राज्यों में भी दबिश दे रही हैं। आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और लड़की की बरामदगी नहीं हो सकी है।
एससी-एसटी एक्ट सहित गंभीर धाराएं
पुलिस ने इस मामले में हत्या, अपहरण, छेड़छाड़ और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर तंत्र के आधार पर जांच तेज कर दी गई है।
राजनीतिक सरगर्मी और प्रशासन की परीक्षा
घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज है। विभिन्न दलों के नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश की, जिससे कई बार हालात और संवेदनशील हो गए। पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ राजनीतिक दबावों से भी निपटना पड़ रहा है। प्रशासन के लिए यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और कानून-व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
गांव में भय और आक्रोश का माहौल
कपसाड़ गांव में महिलाओं और दलित समाज में भय का माहौल है। लोग खुले तौर पर बोल omने से कतरा रहे हैं, जबकि भीतर ही भीतर आक्रोश सुलग रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बेटी सुरक्षित नहीं मिलती और दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक भरोसा बहाल होना मुश्किल है।
कपसाड़ कांड ने एक बार फिर महिला सुरक्षा, दलित उत्पीड़न और कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या अपहृत बेटी सकुशल बरामद होगी और क्या दोषियों को जल्द सलाखों के पीछे भेजकर पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा, या यह मामला भी लंबी जांच और आश्वासनों में उलझ कर रह जाएगा।
