मेरठ में अवैध असलहा फैक्ट्री का भंडाफोड़

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जन वाणी न्यूज़

मेरठ में अवैध असलहा फैक्ट्री का भंडाफोड़

लिसाड़ी गेट पुलिस की सर्जिकल कार्रवाई, पिता–पुत्र गिरफ्तार; भारी मात्रा में बने-अधबने हथियार और डेढ़ लाख नकद बरामद

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता

मेरठ। जनपद में कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहे अवैध असलहा कारोबार पर बड़ा प्रहार करते हुए थाना लिसाड़ी गेट पुलिस ने रिहायशी इलाके में चल रही एक गुप्त हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई इस कार्रवाई में दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में तैयार और अधबने हथियार, सैकड़ों पुर्जे और नगदी बरामद की गई है। इसे उत्तर प्रदेश पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

चेकिंग में खुला राज, मोटरसाइकिल सवार से शुरू हुई पूरी कहानी

विकासपुरी बिजली घर के पास नियमित चेकिंग के दौरान पुलिस ने मोटरसाइकिल सवार समी सैफी उर्फ समीर सैफी उर्फ मेंढक को रोका। तलाशी में उसके कब्जे से 30 बोर की अवैध पिस्टल, जिंदा कारतूस, दो मोबाइल फोन, एक डायरी और हथियारों की बिक्री से कमाए गए 1 लाख 50 हजार रुपये नकद बरामद हुए।

पूछताछ में आरोपी टूट गया और उसने स्वीकार किया कि वह अपने पिता युसुफ सैफी के साथ मिलकर घर में ही अवैध शस्त्र बनाता और सप्लाई करता था।

बना हथियारों का अड्डा, मिघरनी फैक्ट्री का खुलासा

आरोपी की निशानदेही पर जब पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा तो अंदर का नजारा चौंकाने वाला था। अधबनी पिस्टलें, फायरिंग पिन, बैरल, मैगजीन, स्लाइड, स्प्रिंग समेत सैकड़ों हथियारों के पुर्जे बरामद हुए।

साथ ही ग्राइंडर मशीन, ड्रिल बिट, आरी, हथौड़ी और अन्य उपकरण भी मिले, जिनसे असलहे तैयार किए जा रहे थे। मौके से युसुफ सैफी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। रिहायशी क्षेत्र में इस तरह की फैक्ट्री चलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

आपराधिक इतिहास ने बढ़ाई गंभीरता

पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी समीर सैफी के खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित 9 से अधिक मुकदमे पहले से दर्ज हैं। इससे साफ है कि यह कोई नया खिलाड़ी नहीं, बल्कि संगठित अवैध हथियार तंत्र का सक्रिय हिस्सा रहा है।

दोनों आरोपियों के खिलाफ आयुध अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

बड़ा सवाल: सप्लाई चेन कितनी लंबी?

जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की तैयारी में हैं। बरामद मोबाइल फोन और डायरी से संभावित खरीदारों और सप्लायरों की कड़ी जुड़ने की उम्मीद है। आशंका जताई जा रही है कि यह हथियार आसपास के जिलों और आपराधिक गिरोहों तक पहुंचाए जाते रहे होंगे।

यदि समय रहते यह फैक्ट्री पकड़ी न जाती तो कई संगीन वारदातों में इन हथियारों का इस्तेमाल हो सकता था।

पुलिस का स्पष्ट संदेश

एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया कि अवैध हथियार निर्माण और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

निष्कर्ष

मेरठ में घर के भीतर चल रही अवैध असलहा फैक्ट्री का यह खुलासा केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अपराध के उस नेटवर्क पर चोट है जो समाज की शांति को खोखला करता है। यह कार्रवाई बताती है कि सतर्क पुलिसिंग से संगठित अपराध की कमर तोड़ी जा सकती है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत देती है कि ऐसे नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और उन पर लगातार निगरानी जरूरी है।

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