गाजियाबाद सेक्स रैकेट: खुलासा नहीं, अब बड़े नेटवर्क के खुलासे का दबाव सरकार कर रही निगरानी 

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जन वाणी न्यूज़

गाजियाबाद सेक्स रैकेट: खुलासा नहीं, अब बड़े नेटवर्क के खुलासे का दबाव सरकार कर रही निगरानी 

 

गाजियाबाद । वैशाली सेक्टर‑3 स्थित महागुन सरोवर पोर्टिको होटल में चल रहे हाई‑प्रोफाइल सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ भले ही हो चुका है, लेकिन अब मामला पुलिस प्रशासन पर सख्त संदेह और सरकार के निर्देशों तक पहुंच गया है, क्योंकि जांच में रैकेट के संभावित संरक्षकों और प्रभावशाली कनेक्शनों के संकेत भी मिल रहे हैं।

📍 क्या हुआ और पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

पुलिस को सूचना मिली कि सरोवर पोर्टिको होटल में एक संगठित सेक्स रैकेट काफी समय तक बिना रोक‑टोक चले। सूचना पर सहायक पुलिस आयुक्त अभिषेक श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की, जिसमें—

11 महिलाओं को रेस्क्यू किया गया, जिनकी उम्र 21‑31 वर्ष थी।

होटल मैनेजर राहुल शर्मा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों के फोन से 500+ महिलाओं की तस्वीरें और 100+ ग्राहक नंबर बरामद हुए।

आरोप है कि ग्राहकों से ₹15,000‑₹20,000 प्रति रात वसूला जाता था और महिलाओं को न्यूनतम राशि दी जाती थी।

पुलिस ने मामला अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 के तहत दर्ज कर लिया है और जांच को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ा दिया है।

👮 पुलिस प्रशासन पर लापरवाही —  सरकार तक पहुंचा मामला

इस गंभीर मामले में स्थानीय पुलिस की लापरवाही का आरोप भी उठ रहा है:

🟥 बीट पुलिस और बीपीओ निलंबित: जांच में यह पाया गया कि होटल में महीनों तक देह व्यापार चलता रहा, लेकिन स्थानीय बीट एसआई, बीपीओ और थाने के पुलिसकर्मियों को इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी नहीं थी और उन्होंने समय पर उच्चाधिकारियों को सूचित नहीं किया। इस पर बीट एसआई अनुज, बीट पुलिस ऑफिसर मुकेश और लिंक बीपीओ ओमवीर को निलंबित कर दिया गया है।

डीसीपी ने स्पष्ट कहा कि स्थानीय पुलिस तंत्र की उदासीनता ने इस रैकेट को महीनों तक फलने‑फूलने का अवसर दिया और यह कठोर प्रशासनिक जांच का विषय है।

💼 सीसीटीवी फुटेज और सबूत कब्जे में: निलंबन के साथ पुलिस ने होटल के सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल और व्हाट्सएप चैट रिकॉर्ड जब्त कर पूरे नेटवर्क का विश्लेषण शुरू किया है ताकि सबूतों से यह पता लगाया जा सके कि ये गतिविधियाँ कब शुरू हुईं और किन‑किन अधिकारियों के भरोसे पर चलीं।

 

🕵️ फरार आरोपियों की तलाश और सरकार के निर्देश

पुलिस अब चार और मुख्य आरोपियों — सुमित, राहुल, निर्दोष और अफज़ल — की गिरफ्तारी के लिए दबिशें तेज कर रही है। इन पर संभावित संरक्षक और संलिप्त प्रभावशाली लोगों के होने के भी संकेत मिल रहे हैं।

🔎 सरकार भी सक्रिय: मामले की गंभीरता को देखते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस से हर 24‑48 घंटे में प्रगति रिपोर्ट मांगने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष निगरानी और सबूत आधारित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है ताकि कोई भी आरोपी प्रभावशाली प्रभाव का लाभ न उठा सके।

📊 सरकारी निर्देश के तहत फ़रार आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिशें और नाके लगाए जा रहे हैं, साथ ही पुलिस के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट (SIU) को भी इस नेटवर्क से जुड़े सभी रिकॉर्ड की डिजिटल फोरेंसिक जाँच का आदेश दिया गया है।

 

⚖️ नेटवर्क और संभावित संरक्षक तक पहुँचना — जांच की नई दिशा

पुलिस और प्रशासन अब सिर्फ होटल तक सीमित नहीं रह रहे हैं—
✔️ ग्राहकों, व्हाट्सएप बुकिंग ग्रुप्स और डिजिटल लेन‑देन का विश्लेषण किया जा रहा है।
✔️ विदेशी महिलाओं की तस्वीरें भेजने और महंगे कमरों के इस्तेमाल से स्पष्ट हो रहा है कि यह एक संगठित नेटवर्क था, न कि सिर्फ एक स्थानीय रैकेट।
✔️ सीसीटीवी फुटेज, होटल बुकिंग रिकॉर्ड और मोबाइल चैट डेटा से यह पता लगाया जा रहा है कि कौन‑कौन व्यक्तियों ने सक्रिय रूप से सहायता या संरक्षण किया, और क्या किसी बाहरी संरक्षक या प्रभावशाली हस्ती के नाम इस नेटवर्क में जुड़े लोगों के संपर्क हैं।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि अगर प्रभावशाली व्यक्तियों की भागीदारी साबित होती है, तो यह केवल आपराधिक मामला नहीं, बल्कि तंत्र और सरकार की निगरानी विफलता का गंभीर संकेत भी माना जाएगा।

📌 समाज और सुरक्षा तंत्र पर प्रभाव

यह मामला अब सिर्फ होटल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा—मामला एक बड़े संगठित अपराध नेटवर्क, पुलिस की जवाबदेही, प्रभावशाली संरक्षकों और तंत्रगत असंवेदनशीलता तक फैल चुका है।

विश्लेषकों के अनुसार—
🔹 अगर नेटवर्क से जुड़े किसी प्रभावशाली व्यक्ति या संरक्षक का नाम सामने आता है, तो यह पुलिस और प्रशासन के कामकाज पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
🔹 सरकार द्वारा सख्त निगरानी और समय‑बद्ध कार्रवाई के निर्देश इस मामले को एक उदाहरण बनाते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है।
🔹 पुलिस खुद भी फिर से खुद को साबित करने की चुनौती से गुजर रही है।

खोजी खुलासे और आगे की आशंकाएं

पुलिस का दावा है कि—

जांच अब फरार आरोपियों, व्हाट्सएप ग्रुप्स, डिजिटल बुकिंग, विदेशी कनेक्शनों तक फैल गई है।

FIR में आवश्यकतानुसार और धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं।

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी आरोप, चाहे वह प्रभावशाली हो या नहीं, बिना सबूत के नहीं छोड़ा जाएगा।

नोट: कुछ पहलुओं पर जैसे सरकारी निर्देशों की लिखित प्रतियां या प्रभावशाली हस्तियों के नाम, अभी तक पुलिस या उच्च न्यायालय की ओर से आधिकारिक सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है; यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार स्रोतों और अधिकारियों के बयान पर आधारित है।

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