जन वाणी न्यूज़
लोनी में ‘पत्रकार’ की बाढ़: असली कौन, नकली कौन?
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के दौर में पत्रकारिता की साख पर सवाल, ब्लैकमेलिंग और बदनामी के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
लोनी (गाजियाबाद) — सीमावर्ती क्षेत्र लोनी में इन दिनों एक नई बहस ने जोर पकड़ लिया है—आख़िर असली पत्रकार कौन है और नकली कौन? सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सएप ग्रुप्स पर चल रही ‘खोजबीन’ ने इस मुद्दे को और हवा दे दी है। क्षेत्र में पत्रकारों की मानो बाढ़ आ गई है, लेकिन सवाल यह है कि पत्रकारिता की बुनियादी समझ, योग्यता और आचार-संहिता को कितने लोग जानते और मानते हैं?
पत्रकारिता की परिभाषा: पेशा नहीं, जिम्मेदारी
पत्रकारिता केवल माइक, कैमरा या प्रेस कार्ड का नाम नहीं है। यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती है, जिसका मूल उद्देश्य सत्ता से सवाल करना, समाज के वंचित वर्गों की आवाज़ उठाना और निष्पक्ष सूचना जनता तक पहुँचाना है।
पत्रकारिता का धर्म है—सत्य, निष्पक्षता, संतुलन और जनहित।
पत्रकार का कर्तव्य है—तथ्यों की पुष्टि, दोनों पक्षों को स्थान देना और कानून-नियमों का सम्मान करना।
क्या है पत्रकारिता की योग्यता और मानक?
भारत में पत्रकार बनने के लिए कोई एक अनिवार्य लाइसेंस प्रणाली नहीं है, लेकिन मीडिया संस्थानों में नियुक्ति के लिए आमतौर पर पत्रकारिता या जनसंचार की डिग्री/डिप्लोमा को प्राथमिकता दी जाती है।
इसके अलावा, मान्यता प्राप्त पत्रकारों को केंद्र या राज्य स्तर पर प्रेस मान्यता मिलती है। उदाहरण के तौर पर Press Information Bureau (PIB) केंद्र सरकार की ओर से मान्यता प्रदान करता है।
मीडिया आचरण से जुड़े दिशा-निर्देशों की निगरानी के लिए Press Council of India जैसी संस्थाएं भी मौजूद हैं, जो पत्रकारिता की नैतिक सीमाएं तय करती हैं।
लोनी में क्यों उठे सवाल?
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कुछ लोग केवल सोशल मीडिया चैनल या यूट्यूब पेज बनाकर स्वयं को पत्रकार घोषित कर रहे हैं।
बिना तथ्य जांचे खबरें प्रसारित करना
व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए मंच का दुरुपयोग
विज्ञापन या ‘सेटिंग’ के नाम पर दबाव बनाना
ब्लैकमेलिंग और बदनामी के आरोप
इन सबने क्षेत्र में पत्रकारिता की छवि को धूमिल किया है।
सोशल मीडिया बनाम परंपरागत मीडिया
डिजिटल युग में हर व्यक्ति के हाथ में कैमरा और प्लेटफॉर्म है। यह अभिव्यक्ति की आज़ादी का सकारात्मक पहलू है, लेकिन जब बिना प्रशिक्षण और जिम्मेदारी के खबरें प्रसारित होती हैं, तो अफवाह और दुष्प्रचार का खतरा बढ़ जाता है।
व्हाट्सएप ग्रुप्स में चल रही ‘जांच-पड़ताल’ भी कई बार तथ्यों से ज्यादा व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का मंच बन जाती है। इससे वास्तविक पत्रकार भी संदेह के घेरे में आ जाते हैं।
असली पत्रकार की पहचान क्या?
1. तथ्य आधारित रिपोर्टिंग – बिना पुष्टि खबर नहीं।
2. दोनों पक्षों को मौका – एकतरफा नहीं, संतुलित प्रस्तुति।
3. जनहित सर्वोपरि – निजी लाभ नहीं, सामाजिक सरोकार।
4. कानूनी समझ – मानहानि, आईटी एक्ट, प्रेस कानूनों की जानकारी।
5. संस्थान से जुड़ाव – पंजीकृत मीडिया संस्थान या मान्यता।
ब्लैकमेलिंग बनाम खोजी पत्रकारिता
खोजी पत्रकारिता का उद्देश्य भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करना है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति सबूतों के बजाय धमकी या दबाव का सहारा लेकर धन उगाही करता है, तो वह पत्रकारिता नहीं बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यदि किसी के पास ब्लैकमेलिंग या फर्जी पत्रकारिता के ठोस प्रमाण हैं, तो कानूनी कार्रवाई संभव है।
समाधान क्या हो सकता है?
पत्रकार संगठनों द्वारा सदस्यता की स्पष्ट प्रक्रिया
प्रशासन द्वारा मान्यता प्रणाली की पारदर्शिता
मीडिया साक्षरता अभियान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही
आत्ममंथन का समय
लोनी में उठी यह बहस केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश में बदलते मीडिया परिदृश्य का प्रतिबिंब है। पत्रकारिता का धर्म और उद्देश्य स्पष्ट है—सत्य और समाजहित।
जरूरत इस बात की है कि जो सचमुच पत्रकार हैं, वे अपनी साख और मर्यादा बनाए रखें; और जो पत्रकारिता के नाम पर दुरुपयोग कर रहे हैं, उन्हें कानून और समाज दोनों के कठघरे में खड़ा किया जाए।
क्योंकि पत्रकार होना आसान हो सकता है, लेकिन पत्रकारिता निभाना सबसे कठिन जिम्मेदारी है।
