गाजियाबाद में जासूसी साजिश का भंडाफोड़: विदेशी नंबरों से मिल रहे थे टास्क, संवेदनशील ठिकानों की हो रही थी निगरानी

0
18
Oplus_131072

जन वाणी न्यूज़

गाजियाबाद में जासूसी साजिश का भंडाफोड़: विदेशी नंबरों से मिल रहे थे टास्क, संवेदनशील ठिकानों की हो रही थी निगरानी

रेलवे स्टेशन और सुरक्षा प्रतिष्ठान निशाने पर, सौर ऊर्जा संचालित सीसीटीवी से जुटाई जा रही थी खुफिया जानकारी

 

विशेष संवाददाता / जन वाणी

गाजियाबाद। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र में सामने आया है, जहां विदेशी नंबरों के इशारे पर काम कर रहे एक संगठित नेटवर्क का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। यह नेटवर्क रेलवे स्टेशनों, सुरक्षा बलों के ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और वीडियो विदेशों में साझा कर रहा था।

मामले की प्रारंभिक सूचना 14 मार्च को मिली, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन सभी के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

विशेष जांच दल की जांच में बड़ा खुलासा: 11 और नाम आए सामने, 9 गिरफ्तार

मामले की गहराई और संभावित खतरे को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर सघन पूछताछ की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

जांच में 11 अन्य संदिग्धों के नाम उजागर हुए, जिनमें से 9 को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। इससे यह साफ हो गया है कि यह कोई साधारण अपराध नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तहत संचालित गतिविधि थी।

सौर ऊर्जा आधारित स्वतंत्र सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल

पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि आरोपियों को विदेशी नंबरों से निर्देश (टास्क) मिलते थे। इन निर्देशों के तहत उन्होंने कई संवेदनशील स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले सिम-आधारित स्वतंत्र सीसीटीवी कैमरे लगाए थे।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर दो अलग-अलग स्थानों से ऐसे कैमरे बरामद किए हैं। ये कैमरे बिना किसी स्थानीय नेटवर्क के सीधे डेटा प्रसारित करने में सक्षम थे, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचते हुए जानकारी बाहर भेजी जा रही थी।

पैसों का लालच और सुनियोजित तंत्र

जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों को उनके काम के बदले पैसे दिए जाते थे। विदेशी नंबरों से कार्य निर्देश दिए जाते और पूरा होने पर डिजिटल माध्यम से भुगतान किया जाता था।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इन विदेशी नंबरों के पीछे कौन लोग या संगठन सक्रिय हैं और क्या इस नेटवर्क का संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय जासूसी एजेंसी या आतंकी संगठन से है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा, एजेंसियां सतर्क

यह मामला केवल स्थानीय अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है। जिस तरह से संवेदनशील प्रतिष्ठानों की निगरानी की जा रही थी, उससे यह आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी की जा रही थी।

केंद्रीय एजेंसियों को भी इस मामले की जानकारी दे दी गई है और बहु-एजेंसी जांच की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

फरार आरोपियों की तलाश जारी, पूछताछ जारी

गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है, जिससे और भी अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। वहीं, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें सक्रिय रूप से दबिश दे रही हैं।

अधिकारियों का बयान

एडिशनल सीपी राज करण नय्यर ने बताया कि,

> “विशेष जांच दल की पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। विदेशी नंबरों से कार्य निर्देश मिलने और सौर ऊर्जा आधारित सीसीटीवी कैमरों के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हर एंगल से जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।”

सतर्कता ही सुरक्षा

गाजियाबाद का यह मामला एक चेतावनी है कि आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर देश की सुरक्षा को किस तरह चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में आम नागरिकों से लेकर सुरक्षा एजेंसियों तक, सभी को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here