जन वाणी न्यूज़
जिला प्रशासन की पहल: गाजियाबाद में बेसहारा और अनाथों के लिए व्यापक रेस्क्यू अभियान
सार्वजनिक स्थलों पर सघन निरीक्षण, संवेदनशील वर्गों की पहचान कर संरक्षण से जोड़ने की कार्रवाई
गाजियाबाद । जिला प्रशासन के निर्देशन में जनपद गाजियाबाद में शुक्रवार को एक व्यापक रेस्क्यू एवं निरीक्षण अभियान संचालित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर मौजूद अनाथ एवं बेसहारा बच्चों, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था से जोड़ना रहा।
दिनभर चले इस अभियान के दौरान रेस्क्यू टीम ने रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, बाजार क्षेत्रों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों का गहन भ्रमण किया। टीम ने न केवल संवेदनशील परिस्थितियों में रह रहे लोगों की तलाश की, बल्कि उनकी स्थिति का आकलन कर आवश्यकतानुसार त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित कीं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे या शोषण की स्थिति को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकना इस अभियान का प्रमुख लक्ष्य है।
समन्वय और निगरानी पर विशेष जोर
रेस्क्यू टीम में जिला प्रोबेशन कार्यालय और चाइल्डलाइन के अधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। टीम ने आपसी समन्वय के साथ यह सुनिश्चित किया कि चिन्हित किए गए बच्चों और जरूरतमंदों को तत्काल संरक्षण सेवाओं से जोड़ा जा सके। प्रशासन का मानना है कि विभागों के बीच तालमेल के बिना ऐसे अभियानों की प्रभावशीलता संभव नहीं है।
पुलिस की सक्रिय भूमिका
अभियान के दौरान सुरक्षा और संकेत व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने की टीम ने सहयोग प्रदान किया। पुलिस कर्मियों की मौजूदगी से न केवल रेस्क्यू टीम को मौके पर कार्य करने में सुविधा मिली, बल्कि संभावित मानव तस्करी या अन्य आपराधिक गतिविधियों पर भी नजर रखी गई।
मानवीय दृष्टिकोण और प्रशासनिक जिम्मेदारी
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि संवेदनशील वर्गों के प्रति मानवीय जिम्मेदारी का हिस्सा है। अनाथ बच्चों, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ऐसे रेस्क्यू और निरीक्षण अभियान आगे भी नियमित रूप से चलाए जाएंगे। इसका उद्देश्य न केवल तात्कालिक राहत देना है, बल्कि दीर्घकालीन संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था को भी मजबूत करना है, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति उपेक्षा या असुरक्षा का शिकार न हो।
