भाजपा नेत्री भावना बिष्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का अदालत का सख्त आदेश

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

भाजपा नेत्री भावना बिष्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का अदालत का सख्त आदेश

सत्ता के प्रभाव में दबा रहा मामला, धोखाधड़ी-वसूली-धमकी के आरोपों में पति और पुत्र भी घेरे में

लोनी/गाजियाबाद । सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी नेत्री भावना बिष्ट के खिलाफ अदालत के स्पष्ट आदेश पर थाना अंकुर विहार में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एफआईआर में भावना बिष्ट के साथ उनके पति पून सिंह और पुत्र हिमांशु को भी नामजद किया गया है। हालांकि पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन पीड़ित पक्ष ने पुलिस जांच पर भरोसा न होने की बात कहते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है।
यह मामला अब सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सत्ता, पुलिस और न्याय के बीच भरोसे की कसौटी बन गया है।

राजनीतिक पहचान के नाम पर भरोसा, फिर शुरू हुई वसूली

शिकायतकर्ता शिवबाबू पाठक का आरोप है कि भावना बिष्ट ने राजनीतिक पकड़, वरिष्ठ नेताओं से नजदीकी और चुनावी प्रभाव का हवाला देकर विश्वास बनाया। उसी भरोसे की आड़ में उनसे लगातार आर्थिक मदद मांगी गई और वर्षों तक रकम वसूली जाती रही।

लाखों रुपये, वाहन और लगातार आर्थिक मांग

प्रार्थना-पत्र में दर्ज आरोपों के अनुसार—

कमेटी के नाम पर 6 लाख रुपये

सेकेंड हैंड कार भावना बिष्ट के नाम खरीदी गई

पुत्र के लिए मोटरसाइकिल

2023 से 2025 के बीच 5.25 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर

नकद व डिजिटल माध्यम से कुल मिलाकर लाखों रुपये की वसूली

शिकायतकर्ता का कहना है कि हर बार राजनीतिक मजबूरी और पार्टी कार्य के नाम पर रकम मांगी गई।

पैसे रुकते ही धमकी, झूठे मुकदमों का डर

शिकायत में आरोप है कि जैसे ही और पैसा देने से इनकार किया गया, रवैया बदल गया।
भावना बिष्ट, उनके पति और पुत्र पर—

झूठे बलात्कार व छेड़छाड़ के मुकदमे में फँसाने

राजनीतिक रसूख से बदनाम करने

25 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग

जान से मारने की धमकी

जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

थानों के चक्कर और पुलिस पर दबाव का आरोप

शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि प्रभावशाली राजनीतिक पहचान के चलते मामला दबाने का प्रयास किया गया और उल्टा उन पर समझौते का दबाव बनाया गया।
इसी क्रम में 50 हजार रुपये ऑनलाइन और 2 लाख रुपये नकद लेकर कथित समझौता कराए जाने का भी उल्लेख है।

अदालत का हस्तक्षेप, सीधे एफआईआर का आदेश

मामला अदालत पहुंचा तो तस्वीर बदली। अदालत ने साफ कहा कि शिकायत में संज्ञेय अपराध बनता है और थाना अंकुर विहार को तत्काल मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया।

कार्रवाई शुरू, लेकिन जांच पर भरोसा नहीं

अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन पीड़ित पक्ष का कहना है कि उसे स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्होंने निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभाव-मुक्त जांच की मांग की है।

सत्ता बनाम कानून: भरोसे की अग्निपरीक्षा

भाजपा नेत्री पर लगे आरोप, अदालत का सीधा आदेश और अब पुलिस जांच पर उठते सवाल—इस पूरे प्रकरण ने सत्ता और कानून के रिश्ते को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष इसे सत्ता संरक्षण से जोड़कर देख रहा है, वहीं आम लोगों के बीच भी यह सवाल गूंज रहा है कि क्या जांच निष्पक्ष होगी।

हर कदम पर निगरानी

अब निगाहें पुलिस की विवेचना पर टिकी हैं। जांच की दिशा और निष्पक्षता यह तय करेगी कि यह मामला केवल एफआईआर तक सीमित रहेगा या कानून सत्ता के दबाव से ऊपर उठकर अपना रास्ता तय करेगा।

यह समाचार अदालत के आदेश एवं शिकायतकर्ता द्वारा दायर प्रार्थना-पत्र में दर्ज तथ्यों पर आधारित है। सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

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