जन वाणी न्यूज़
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात बिछाने में जुटी भाजपा
14 महीने पहले ही शुरू हुआ टिकट मंथन, मौजूदा विधायकों की बढ़ी बेचैनी
रविन्द्र बंसल
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव 2027 अभी करीब 14 महीने दूर हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी से चुनावी तैयारियों को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दे दिए हैं कि इस बार टिकट वितरण में कोई ढील नहीं होगी और “परफॉर्मेंस बनाम परसेप्शन” के आधार पर ही प्रत्याशी तय किए जाएंगे।
पहले फेज में टिकट छंटनी, ‘मिशन जीत’ की जिम्मेदारी सौपी गई
सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। पहले चरण में उन विधानसभा क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है, जहां पार्टी के मौजूदा विधायक कमजोर माने जा रहे हैं या जहां जनता के बीच नाराजगी की खबरें मिल रही हैं।
पार्टी ने इस पूरी कवायद की जिम्मेदारी एक विशेष “चयन टीम” को सौंपी है, जो हर विधानसभा क्षेत्र में जाकर मौजूदा विधायक, संभावित दावेदारों और स्थानीय मुद्दों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है।
हर सीट पर रिपोर्ट कार्ड, सर्वे और फीडबैक
भाजपा नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि इस बार सिर्फ संगठन में पद या पुराने योगदान के आधार पर टिकट नहीं मिलेगा। बताया जा रहा है कि—
हर विधानसभा सीट पर ग्राउंड सर्वे
जनता के बीच विधायक की छवि
संगठनात्मक पकड़
विपक्ष की मजबूती
स्थानीय असंतोष और मुद्दे
इन सभी बिंदुओं पर अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जिन मौजूदा विधायकों के खिलाफ नकारात्मक रिपोर्ट मिल रही है, उनका टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है।
2022 और 2024 से सबक
पार्टी सूत्रों का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में कुछ सीटों पर अपेक्षित प्रदर्शन न होने के पीछे गलत टिकट चयन और जमीनी नाराजगी बड़ी वजह रही।
इसी अनुभव के चलते भाजपा इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और समय रहते कमजोर कड़ियों को बदलने की रणनीति पर काम कर रही है।
403 विधानसभा सीटों पर नजर, 400 से अधिक सीटों का लक्ष्य
भाजपा की पूरी रणनीति उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को केंद्र में रखकर तैयार की जा रही है। पार्टी का आंतरिक लक्ष्य एक बार फिर 400 के पार पहुंचने का बताया जा रहा है।
इसके लिए पार्टी न केवल अपने परंपरागत वोट बैंक को साधने में जुटी है, बल्कि उन सीटों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां पिछले चुनावों में जीत का अंतर बेहद कम रहा था।
मौजूदा विधायकों में बढ़ी बेचैनी
पार्टी की इस आक्रामक रणनीति के बाद कई मौजूदा विधायकों में बेचैनी साफ नजर आने लगी है। कई क्षेत्रों से यह भी खबर है कि विधायक अब अचानक जनता के बीच ज्यादा सक्रिय हो गए हैं—
कहीं शिलान्यास, कहीं उद्घाटन, तो कहीं जनसुनवाई का दौर तेज हो गया है।
भाजपा का स्पष्ट संदेश
भाजपा नेतृत्व का संदेश साफ है—
“संगठन से बड़ा कोई नहीं, जीत पहली शर्त है।”
जो जनविश्वास पर खरा उतरेगा, वही उम्मीदवार बनेगा; बाकी को किनारे किया जा सकता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 की लड़ाई अभी से गर्माने लगी है। भाजपा की शुरुआती तैयारी यह साफ संकेत दे रही है कि आने वाले महीनों में टिकट, चेहरे और समीकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति में बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।
