इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख पुलिस बरामदगी की हर कार्रवाई की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य, डीजीपी को एसओपी बनाने का निर्देश

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़ 

इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख
पुलिस बरामदगी की हर कार्रवाई की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य, डीजीपी को एसओपी बनाने का निर्देश

लखनऊ ब्यूरो । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा आदेश दिया है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 105 और उत्तर प्रदेश बीएनएसएस नियमावली, 2024 के नियम 18 के अनुपालन हेतु पुलिस की तलाशी और बरामदगी की प्रत्येक कार्रवाई की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तत्काल जारी करें।

यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने 6 जनवरी को एक अभियुक्त शादाब को जमानत देते समय पारित किया। शादाब पर चोरी की 40 मोटरसाइकिलों की बरामदगी का आरोप था।

रिकॉर्डिंग न होने से अभियोजन पर सवाल

न्यायालय ने मामले में पुलिस की कार्यवाही पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि बरामदगी की प्रक्रिया के दौरान ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई, जबकि बीएनएसएस की धारा 105 के तहत यह अनिवार्य है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश बीएनएसएस नियम, 2024 का नियम 18 साफ तौर पर निर्देश देता है कि ऐसी रिकॉर्डिंग ई-साक्ष्य मोबाइल एप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति देशवाल ने टिप्पणी की,
“इन प्रावधानों का पालन न किया जाना न केवल पूरे अभियोजन कथानक पर संदेह पैदा करता है, बल्कि यह पुलिस की लापरवाही और मनमानी को भी दर्शाता है।”

पारदर्शिता और निर्दोषों के अधिकारों की सुरक्षा

अदालत ने कहा कि तलाशी और बरामदगी की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी भी प्रकार की झूठी फँसाने की आशंका से नागरिकों की रक्षा हो सके और न्यायालय में साक्ष्य की विश्वसनीयता मजबूत हो।
न्यायालय के शब्दों में,
“इस प्रकार की रिकॉर्डिंग का उद्देश्य निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करना और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के लिए एक मजबूत, निर्विवाद साक्ष्य उपलब्ध कराना है।”

परिपत्र जारी, पर एसओपी अब तक नहीं

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि डीजीपी द्वारा 21 जुलाई 2025 को ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य बताते हुए एक परिपत्र जारी किया गया था, लेकिन कानून के अनुसार अभी तक कोई समग्र और विस्तृत एसओपी जारी नहीं की गई।

हाईकोर्ट के निर्देश

अदालत ने डीजीपी को निर्देश दिए कि—

बीएनएसएस की धारा 105 और उत्तर प्रदेश बीएनएसएस नियम, 2024 के नियम 18 के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु एक विस्तृत एसओपी तैयार कर जारी की जाए।

यह एसओपी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के समन्वय से बनाई जाए, ताकि ई-साक्ष्य पोर्टल पर जब्ती मेमो और रिकॉर्डिंग का समुचित अपलोड सुनिश्चित हो सके।

एसओपी में यह प्रावधान भी शामिल किया जाए कि निर्देशों का पालन न करने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

न्यायिक कसौटी पर टिके साक्ष्य

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के निर्देश इसलिए आवश्यक हैं ताकि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके और पुलिस द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य न्यायिक परीक्षण के दौरान टिक सकें।

 

बीएनएसएस धारा 105 और यूपी बीएनएसएस नियम 18: मुख्य बिंदु

धारा 105, बीएनएसएस 2023: हर तलाशी और बरामदगी की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य।

नियम 18, यूपी बीएनएसएस नियम 2024: रिकॉर्डिंग ई-साक्ष्य एप या अन्य निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से की जाएगी।

उद्देश्य: झूठे आरोपों की रोकथाम, पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना।

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