प्रशासनिक लापरवाही ने ली हादसे की शक्ल दिल्ली–मेरठ मार्ग पर खुले पुल से नाले में गिरे स्कूटी सवार भाई-बहन, किशोरी की हालत गंभीर

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

प्रशासनिक लापरवाही ने ली हादसे की शक्ल

दिल्ली–मेरठ मार्ग पर खुले पुल से नाले में गिरे स्कूटी सवार भाई-बहन, किशोरी की हालत गंभीर

मोदीनगर | 23 जनवरी
दिल्ली–मेरठ मार्ग पर कपड़ा मिल नाले के पुल पर वर्षों से चली आ रही घोर प्रशासनिक अनदेखी आखिरकार एक गंभीर हादसे में तब्दील हो गई। बीती रात पुल के खुले हिस्से और जर्जर दीवार के कारण स्कूटी सवार भाई-बहन संतुलन खो बैठे और सीधे गहरे नाले में जा गिरे। हादसे में 17 वर्षीय किशोरी साक्षी गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उसका भाई अजय मामूली चोटों के साथ बाल-बाल बच गया।

 

पुराना पुल बना मौत का जाल

नया निर्माण, पुरानी संरचना और बीच में खुला 5 फीट का गैप

जानकारी के अनुसार कपड़ा मिल नाले का यह पुल अपनी मियाद पूरी कर चुका है। वाहनों का दबाव कम करने के नाम पर एक दशक से अधिक समय पहले पुल के मेरठ से गाजियाबाद जाने वाले हिस्से का नया निर्माण कर दिया गया, लेकिन गाजियाबाद से मेरठ की ओर जाने वाला हिस्सा आज भी पुराने और जर्जर पुल पर ही छोड़ा गया। सबसे गंभीर लापरवाही यह रही कि दोनों पुलों के बीच 4 से 5 फीट का खुला गैप छोड़ दिया गया, जिसे न तो पाटा गया और न ही कोई सुरक्षा अवरोध या चेतावनी संकेत लगाए गए।

समय के साथ पुराना पुल और उसकी दीवारें कमजोर होती चली गईं। कई स्थानों पर दीवार गिर चुकी थी, सपोर्ट हट चुका था, जिससे यह स्थान हादसों को खुला न्योता देने लगा।

 

रात के अंधेरे में हुआ हादसा

स्कूटी डिवाइडर से टकराई, नाले में गिरे भाई-बहन

सुदामा पुरी निवासी 19 वर्षीय अजय अपनी 17 वर्षीय बहन साक्षी के साथ स्कूटी से राज चौराहा की ओर से गोविंदपुरी जा रहा था। जैसे ही स्कूटी पुल की जर्जर दीवार के पास पहुंची, खुले गैप और टूटी संरचना के कारण स्कूटी असंतुलित हो गई। स्कूटी डिवाइडर से टकराई और दोनों भाई-बहन गहरे नाले में जा गिरे।

 

राहगीरों की सूझबूझ से बची जान

घायल किशोरी अस्पताल में भर्ती

हादसे को देखकर मौके से गुजर रहे राहगीरों ने तत्काल नाले में उतरकर दोनों को बाहर निकाला और जीवन अस्पताल में भर्ती कराया। अजय को मामूली चोटों के चलते उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि साक्षी गंभीर रूप से घायल होने के कारण अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज जारी है।

हादसे के बाद जागा प्रशासन

अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर अस्पताल पहुंचकर दिया आश्वासन

शुक्रवार सुबह हादसे की जानकारी मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। उप जिलाधिकारी अजीत सिंह, तहसीलदार रजत सिंह और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी नरेंद्र मोहन मिश्रा घटनास्थल पर पहुंचे और पुल की स्थिति का निरीक्षण किया। इसके बाद तीनों अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायल किशोरी का हाल-चाल जाना।

सवालों के घेरे में सिस्टम

समय रहते सुधारा होता तो टल सकता था हादसा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। वर्षों से मौजूद खुले गैप, टूटी दीवार और जर्जर पुल की ओर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। यदि समय रहते मरम्मत और सुरक्षा के इंतजाम किए जाते तो एक मासूम किशोरी को गंभीर चोटें न लगतीं।

अधिकारियों का आश्वासन

जल्द होगा गैप और दीवार का सुधार

इस संबंध में उप जिलाधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि दोनों पुलों के बीच छोड़े गए गैप और टूटी हुई दीवार को संबंधित विभाग से शीघ्र दुरुस्त कराया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई दुर्घटना न हो।

बड़ा सवाल

क्या हर बार हादसे के बाद ही जागेगा प्रशासन?

यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े नुकसान के बाद ही हरकत में आएगा, या फिर समय रहते जिम्मेदारी निभाकर आम नागरिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

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