रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
बरसात की एक फुहार और तालाब बनी सड़क
मुख्य मार्ग दिल्ली – सहारनपुर रोड, लोनी–गाजियाबाद रोड पर जलभराव, पैदल यात्री बेहाल, वाहन रेंगने को मजबूर
लोनी । मध्यम दर्जे की बारिश ने एक बार फिर लोनी के बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी। लोनी का मुख्य मार्ग दिल्ली- सहारनपुर रोड, लोनी–गाजियाबाद रोड बारिश के बाद तालाब में तब्दील हो गया। चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। सड़क, नाली और फुटपाथ का फर्क मिट चुका है। हालात ऐसे हैं कि पैदल चलना दूभर हो गया है और वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करना पड़ रहा है।
पानी में डूबी सड़क, रोज़मर्रा की ज़िंदगी ठप
बारिश थमने के बाद भी सड़क पर जलभराव जस का तस बना हुआ है। दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं, ऑटो और कारें बीच सड़क में बंद हो रही हैं। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक परेशान हैं। पैदल यात्रियों को घुटनों तक भरे पानी से गुजरना पड़ रहा है, जिससे हादसों और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
दशकों पुरानी समस्या, समाधान शून्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं है। दशकों से लोनी में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। हर बरसात में यही हाल होता है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकला। नालियों की सफाई कागजों में होती है, ज़मीन पर नहीं। नतीजा—थोड़ी सी बारिश और पूरा इलाका जलमग्न।
व्यापार ठप, आमजन त्रस्त
जलभराव के कारण दुकानों तक ग्राहक नहीं पहुंच पा रहे, छोटे व्यापारियों का नुकसान हो रहा है। एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित है। कई स्थानों पर खुले गड्ढे पानी में छिपे हुए हैं, जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं।
चुनावी वादे, बाद में मौन
लोनी के नागरिकों में आक्रोश है। आरोप है कि चुनाव के समय लंबे-चौड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि आज मौन हैं। हर चुनाव में जल निकासी, सड़क सुधार और नालियों के पुनर्निर्माण की बातें होती हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही वादे हवा हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि नेताओं की यह फितरत बन चुकी है—वादे करो, वोट लो और फिर मुकर जाओ।
प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मानसून से पहले नालियों की सफाई, सड़क की मरम्मत और वैकल्पिक जलनिकासी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या हर साल लोनी के लोग यूं ही जलभराव की सजा भुगतते रहेंगे?
स्थायी समाधान की मांग
लोनी के निवासियों की एक ही मांग है—स्थायी और वैज्ञानिक जल निकासी व्यवस्था। सड़क के समुचित लेवलिंग, नालियों के चौड़ीकरण, नियमित सफाई और जवाबदेही तय किए बिना हालात नहीं बदलेंगे। लोगों का कहना है कि अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
बरसात का यह दृश्य लोनी की हकीकत बयां करता है—जहां हर फुहार के साथ सिस्टम की नाकामी उजागर हो जाती है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार जागेंगे, या लोनी यूं ही हर मानसून में डूबता रहेगा?
