जन्मदिन पार्टी की आड़ में रची गई हत्या की साजिश वीडियो कॉल ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़ा सनसनीखेज मामला

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

जन्मदिन पार्टी की आड़ में रची गई हत्या की साजिश

वीडियो कॉल ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़ा सनसनीखेज मामला

न्यूड वीडियो कॉल, रिकॉर्डिंग और वसूली के आरोप, डीएसपी तक पहुंच का दावा

डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच तेज

गोरखपुर । जनपद में युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला अब साधारण आपराधिक घटना नहीं रह गया है। पुलिस जांच में सामने आ रहे तथ्यों के अनुसार यह प्रकरण जन्मदिन पार्टी की आड़ में रची गई साजिश, वीडियो कॉल के जरिए कथित ब्लैकमेलिंग और पैसों की वसूली से जुड़ा हुआ है। घटनाक्रम ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि डिजिटल अपराधों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस के अनुसार मृतक को जन्मदिन पार्टी में शामिल होने के बहाने बुलाया गया था। पार्टी स्थल पर पहले से मौजूद लोगों के बीच पैसों को लेकर तनाव था। इसी तनाव के दौरान विवाद बढ़ा और अचानक पिस्टल निकालकर गोली चला दी गई, जिससे युवक की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई।

जांच में यह तथ्य सामने आया है कि अंशिका सिंह नामक महिला पर वीडियो कॉल के माध्यम से न्यूड होकर बात करने, उसकी रिकॉर्डिंग कराने और बाद में रिकॉर्डिंग के आधार पर पैसे की मांग कर ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह गतिविधि किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई लोगों से संपर्क के साक्ष्य मिले हैं।

मामले में उस समय हड़कंप मच गया जब जांच के दौरान यह दावा सामने आया कि एक पुलिस उपाधीक्षक से भी वीडियो कॉल किया गया था। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, वीडियो फाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक वीडियो कॉल और कथित ब्लैकमेलिंग के चलते पैसों को लेकर दबाव लगातार बढ़ता गया। यही दबाव और आपसी तनाव अंततः हत्या का कारण बना। घटना के बाद घायल को अस्पताल ले जाया गया, जहां भी दबाव बनाने और डराने-धमकाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम की गंभीरता और बढ़ जाती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो मामले में हत्या, आईटी एक्ट, ब्लैकमेलिंग, आपराधिक षड्यंत्र और अवैध डिजिटल सामग्री से जुड़ी कठोर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

यह प्रकरण डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग, वीडियो कॉल के जरिए अपराध और समय रहते रोकथाम न होने के खतरनाक परिणामों को उजागर करता है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि शुरुआती स्तर पर शिकायतों पर सख्त कार्रवाई होती, तो शायद यह मामला हत्या तक नहीं पहुंचता।

गोरखपुर की यह घटना अब एक हत्या भर नहीं रह गई है, बल्कि जन्मदिन पार्टी की आड़ में रची गई साजिश, साइबर ब्लैकमेलिंग और संगठित अपराध के खतरनाक गठजोड़ का उदाहरण बनती जा रही है। अंतिम सत्य न्यायिक और तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि मामला अत्यंत गंभीर और व्यापक प्रभाव वाला है।

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