
रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
कानपुर में खाकी की साख पर गहरा दाग
स्कॉर्पियो सवार पुलिसकर्मी पर नाबालिग छात्रा के अपहरण व दुष्कर्म का सनसनीखेज आरोप
कानपुर । कानून-व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बेहद शर्मनाक और गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कॉर्पियो सवार एक पुलिसकर्मी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया। यह घटना न केवल मानवता को शर्मसार करती है, बल्कि खाकी की विश्वसनीयता और पुलिस की जवाबदेही पर भी तीखे सवाल खड़े करती है।
कार में दो घंटे तक दरिंदगी का आरोप
परिजनों के मुताबिक, आरोपी छात्रा को जबरन कार में बैठाकर ले गए और करीब दो घंटे तक कार के भीतर ही उसके साथ अमानवीय कृत्य करते रहे। आरोप है कि जब पीड़िता बेहोश हो गई, तब आरोपी उसे घर के सामने फेंककर फरार हो गए। गंभीर हालत में मिली छात्रा को तत्काल उपचार के लिए भेजा गया।
डायल-112 पर सूचना, फिर भी कार्रवाई ठप?
पीड़िता के भाई का आरोप है कि घटना की सूचना देर रात ही डायल-112 पर दी गई, इसके बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। परिजनों का कहना है कि आरोपी के पुलिसकर्मी होने के कारण मामले को दबाने और टालने की कोशिश की गई, जिससे आक्रोश और गहराता गया।
अफसरों के दरवाजे तक पहुंची पीड़िता, तब जागी पुलिस
मंगलवार को पीड़िता और उसके परिजन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष पहुंचे, तब जाकर मामला सुर्खियों में आया। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया।
सचेंडी थाना क्षेत्र से जुड़ा मामला
पुलिस के अनुसार, यह पूरी घटना सचेंडी थाना क्षेत्र की है। प्रकरण की जांच जारी बताई जा रही है।
पुलिस का आधिकारिक पक्ष
पुलिस अधिकारियों का कहना है—
पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है
प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है
मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है
दोष सिद्ध होने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी
हालांकि, अब तक आरोपी पुलिसकर्मी की पहचान या गिरफ्तारी को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
कानून के रखवाले पर ही सवाल
यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि नाबालिगों की सुरक्षा, पुलिस की संवेदनशीलता और जवाबदेही की कठोर परीक्षा है। जिन कंधों पर कानून की रक्षा का भार है, उन्हीं पर लगे आरोपों ने पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
फिलहाल, पीड़िता और उसका परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है, जबकि पूरे जनपद की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और दोषियों पर कब तक शिकंजा कसता है।
