शासकीय अधिवक्ता संजीव बखरवा
जन वाणी न्यूज़
गाजियाबाद: 10 साल बाद आया न्याय, 74 वर्षीय दोषी को 10 वर्ष की कठोर सजा — मासूम से दुष्कर्म मामले में कोर्ट का सख्त संदेश
वरिष्ठ संवाददाता जन वाणी
गाजियाबाद । विजयनगर थाना क्षेत्र में चार वर्षीय मासूम के साथ हुए जघन्य यौन शोषण मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 74 वर्षीय आरोपी को दोषी ठहराया है। लगभग एक दशक तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹2 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई, जिससे न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है।
यह मामला उस समय सामने आया था जब डे-केयर सेंटर संचालिका के ससुर, जो घटना के समय करीब 62 वर्ष के थे, पर मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगा। घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था और बाल सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े किए थे। पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई।
पीड़िता के पिता ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से अदालत और अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “देर से ही सही, लेकिन न्याय मिला।” इस दौरान सरकारी अधिवक्ता संजीव बखरवा और वरिष्ठ संवाददाता जयवीर मावी की मौजूदगी में परिवार की भावनाएं सामने आईं।
इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे एक “मिसाल” बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के कड़े फैसले समाज में यह संदेश देते हैं कि मासूमों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है। बाल संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई से भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लग सकता है।
हालांकि, इस मामले ने न्याय प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय पर भी सवाल खड़े किए हैं। 10 वर्षों का इंतजार पीड़ित परिवार के लिए मानसिक और सामाजिक रूप से बेहद कठिन रहा। विशेषज्ञों ने ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है।
यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन जब मिलता है तो अपराधियों के लिए कड़ा संदेश लेकर आता है।
