हिरासत से भागे युवक की ट्रक से टकराकर मौत, पुलिस पर हत्या के आरोप; लापरवाही में कर्मी निलंबित

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जन वाणी न्यूज़

हिरासत से भागे युवक की ट्रक से टकराकर मौत, पुलिस पर हत्या के आरोप; लापरवाही में कर्मी निलंबित

निवाड़ी क्षेत्र की घटना ने खड़े किए गंभीर सवाल, परिजनों का आरोप—पुलिस पिटाई से गई जान

रविंद्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता / जन वाणी न्यूज़

गाजियाबाद । निवाड़ी थाना क्षेत्र की पतला चौकी में हुई एक संदिग्ध घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 अप्रैल की रात गश्त के दौरान पुलिस को अमित (करीब 35 वर्ष) नशे की हालत में घायल अवस्था में मिला, जिसे प्राथमिक उपचार के लिए मुरादनगर सीएचसी ले जाया गया। यहीं से घटनाक्रम ने अचानक मोड़ लिया, जब उपचार के दौरान ही अमित अस्पताल से निकलकर मुख्य सड़क पर पहुंच गया और तेज रफ्तार ट्रक से टकरा गया। हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को पुलिस ने दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अस्पताल से भागने और सड़क हादसे की कहानी पर उठे सवाल

पुलिस का दावा है कि युवक खुद अस्पताल से निकलकर सड़क पर आया और हादसे का शिकार हुआ, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर एक घायल व्यक्ति पुलिस की निगरानी में होते हुए अस्पताल से कैसे निकल गया, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। सुरक्षा में चूक और निगरानी की कमी को लेकर पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

परिजनों का आरोप—पुलिस ने पीट-पीटकर की हत्या

मामले ने तूल तब पकड़ा जब मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमित की मौत सड़क हादसे में नहीं बल्कि पुलिस की पिटाई से हुई है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी हालत बिगड़ी और बाद में घटना को हादसे का रूप देने की कोशिश की गई। इस आरोप के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और परिजनों ने कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया।

लापरवाही पर एक्शन, पुलिसकर्मी निलंबित

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही परिजनों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की कार्यशैली और जवाबदेही पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर पुलिस हिरासत में सुरक्षा, मानवाधिकार और जवाबदेही के मुद्दों को उजागर करती है। यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला बेहद गंभीर हो सकता है, वहीं यदि यह केवल हादसा है तो पुलिस की लापरवाही भी कम चिंताजनक नहीं है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की नजरें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई सामने लाएगी।

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